Amit Shah in Ludhiana: रावण के पुतले के साथ क्या नशे के उस रावण का भी अंत होगा, जो पंजाब के घरों से उनके बेटे छीन रहा है? लुधियाना में विजयादशमी के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ बड़ी लड़ाई का ऐलान किया। उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया। लेकिन इस राजनीतिक ऐलान के बीच तीन ऐसे परिवारों का दर्द भी सामने आया, जिन्होंने नशे के कारण अपने बेटों को खो दिया।
रावण दहन के मंच से नशे के खिलाफ बड़ा संदेश
विजयादशमी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हर साल रावण के पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन पंजाब में इस बार रावण का एक चेहरा अलग था। यह चेहरा था 'चिट्टे' यानी नशीले पदार्थों के उस कथित साम्राज्य का, जिसने कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है।
मंगलवार को लुधियाना में केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह विजयादशमी समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नशे के प्रतीकात्मक रावण का दहन किया। अमित शाह ने कहा कि विजयादशमी केवल रावण पर भगवान श्रीराम की जीत का उत्सव नहीं है, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, लालच और बुराइयों को खत्म करने का भी दिन है। लेकिन इस मौके पर उनका संदेश सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं रहा। उन्होंने पंजाब से नशे के कारोबार को खत्म करने की समयसीमा भी तय की।
31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त बनाने का संकल्प
अमित शाह ने ऐलान किया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक पूरे पंजाब को नशे के कारोबार से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की टोल-फ्री हेल्पलाइन पर नशे के कारोबार से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं। केंद्र सरकार ऐसी सूचनाओं पर कार्रवाई करेगी।
शाह ने अपनी सरकार के पिछले फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 और 35A को हटाया गया, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की गई और नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में काम हुआ। अब नशे के कारोबार को भी खत्म करने का लक्ष्य है।
हालांकि, पंजाब को नशा मुक्त बनाने की राह आसान नहीं होगी। इसके लिए नशे की सप्लाई रोकने, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई करने, नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज और पुनर्वास जैसे मोर्चों पर भी प्रभावी काम करना होगा।
तीन परिवारों का दर्द, जिसने अमित शाह को झकझोरने की बात कही
नशे के खिलाफ संकल्प के बीच अमित शाह ने पंजाब में उन तीन परिवारों से मुलाकात का जिक्र किया, जिन्होंने अपने बेटों को खो दिया है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की आंखों में आंसू, उनके सवाल और उनका दर्द किसी को भी अंदर तक झकझोर सकते हैं।
यहां मामला केवल कानून-व्यवस्था या राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं रह जाता। जब किसी परिवार का बेटा दुनिया छोड़ देता है, तो उसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें, भाई-बहनों का सहारा और पूरे परिवार का भविष्य भी प्रभावित होता है। अमित शाह ने कहा कि इन तीन लोगों को न्याय दिलाना और नशे के कारोबार को खत्म करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
गुलजार सिंह की मौत का मामला: परिवार ने क्या आरोप लगाए?
अमित शाह ने संगरूर जिले के तूर बनजारा गांव में दिवंगत गुलजार सिंह के परिवार से भी मुलाकात की। गुलजार सिंह दलित समुदाय से आने वाले दिहाड़ी मजदूर थे, जिनकी मौत आत्महत्या से हुई थी। उनके परिवार ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह के मुताबिक, अमित शाह ने परिवार के साथ करीब 15 से 20 मिनट तक बातचीत की और उन्हें आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। लखविंदर ने दावा किया कि गृह मंत्री ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
गुलजार सिंह के दूसरे बेटे शहबाज ने भी कहा कि परिवार ने अपने पिता की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने और पंजाब से नशे की समस्या खत्म करने की मांग रखी। परिवार का आरोप है कि गुलजार सिंह ने एक वीडियो में हरपाल सिंह चीमा का नाम लिया था, लेकिन पंजाब पुलिस ने एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं किया। परिवार ने इस मामले में जवाबदेही की मांग की है।
CBI जांच की मांग क्यों उठी?
अमित शाह ने कहा कि पंजाब सरकार ने एक हत्या के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी है। उन्होंने राज्य सरकार से बाकी दो मामलों की जांच भी CBI को सौंपने का आग्रह किया। उन्होंने भरोसा जताया कि इन मामलों में न्याय मिलेगा। शाह ने कहा कि जांच CBI को सौंपे जाने के बाद अगर इन हत्याओं में कोई प्रभावशाली व्यक्ति शामिल पाया जाता है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाएगा।
इस बयान के साथ मामला अब केवल परिवारों के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। जांच किस एजेंसी के पास होगी, आरोपों की निष्पक्ष जांच कैसे होगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, ये सवाल भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
क्या रावण दहन के साथ नशे का कारोबार भी खत्म हो पाएगा?
पंजाब में नशे की समस्या का समाधान केवल एक घोषणा से नहीं होगा। 2029 तक नशा मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य तभी वास्तविकता बन सकता है, जब नशे की तस्करी करने वाले नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई हो, दोषियों को सजा मिले और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज व समाज में दोबारा स्थापित होने का अवसर मिले। इसके साथ ही उन परिवारों को न्याय मिलना भी जरूरी है, जो अपने बच्चों को खोने के बाद जवाब तलाश रहे हैं।
लुधियाना में रावण के पुतले का दहन हो चुका है। अब असली परीक्षा उस व्यवस्था की है, जो पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का दावा कर रही है। क्योंकि किसी राज्य को नशा मुक्त बनाने की असली जीत तब होगी, जब माता-पिता को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता तो हो, लेकिन नशे की वजह से उन्हें खो देने का डर न हो।