Navratri Diya Tips: शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर मां दुर्गा की पूजा, कन्या पूजन और हवन के साथ दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई, तिजोरी और पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

नवरात्रि के अंतिम दिनों यानी महाष्टमी और महानवमी पर भक्त मां दुर्गा की विशेष आराधना करते हैं। कई घरों में इन दिनों कन्या पूजन, हवन और भोग लगाने के साथ शाम के समय दीपक भी जलाया जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में दीपक को शुभता और प्रकाश का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं ऐसी पांच जगहों के बारे में, जहां अष्टमी-नवमी पर दीपक जलाने की परंपरा निभाई जा सकती है।

1. घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक

धार्मिक मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर शाम के समय मुख्य दरवाजे के पास दीपक जलाकर घर में सुख-शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है। दीपक को ऐसी सुरक्षित जगह पर रखें, जहां आने-जाने वाले लोगों को परेशानी न हो। दरवाजे पर पर्दे, जूते-चप्पल या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के पास दीपक रखने से बचें।

2. तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीया

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय माना जाता है। कई परिवारों में रोज शाम तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है। नवरात्रि के दौरान भी अष्टमी और नवमी की शाम तुलसी के पास दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना की जा सकती है। दीपक को पौधे से उचित दूरी पर रखें, ताकि उसकी लौ से तुलसी की पत्तियों या आसपास की किसी वस्तु को नुकसान न पहुंचे।

3. रसोई में दीपक जलाने की भी है परंपरा

भारतीय धार्मिक परंपराओं में रसोई को मां अन्नपूर्णा और अन्न की समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसी मान्यता के तहत कुछ परिवार नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर रसोई में साफ-सुथरी जगह पर दीपक जलाते हैं। कुछ परंपराओं में पानी रखने के स्थान के पास दीपक जलाकर घर में अन्न और जल की पर्याप्तता की कामना की जाती है। हालांकि, गैस चूल्हे, सिलेंडर, पर्दों और अन्य ज्वलनशील सामान के पास दीपक बिल्कुल न रखें।

4. तिजोरी या धन रखने की जगह के पास जलाएं दीया

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धन रखने वाली जगह या तिजोरी के पास दीपक जलाना आर्थिक सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। अष्टमी और नवमी पर कुछ लोग इस परंपरा को निभाते हुए मां दुर्गा से परिवार की खुशहाली और आर्थिक स्थिरता की प्रार्थना करते हैं। दीपक को तिजोरी के अंदर रखने के बजाय उससे सुरक्षित दूरी पर किसी स्थिर स्थान पर रखें। नकदी, कागजों, कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के पास खुली लौ रखने से बचना चाहिए।

5. पीपल के पेड़ के पास जलाएं सरसों के तेल का दीपक

हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है। कुछ धार्मिक परंपराओं में पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाने की प्रथा है। इसे शनि सहित अन्य ग्रहों की शांति और शुभ फल की कामना से जोड़ा जाता है। यदि अष्टमी या नवमी की शाम यह परंपरा निभाना चाहते हैं, तो दीपक को पेड़ की जड़ों, सूखे पत्तों और घास से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें। सार्वजनिक जगह पर दीपक जलाते समय आग लगने के खतरे और स्थानीय नियमों का भी ध्यान रखें।

दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्रि में दीपक जलाना कई परिवारों की धार्मिक आस्था का हिस्सा है। इसे करते समय साफ-सफाई, श्रद्धा और सुरक्षा को प्राथमिकता दें। दीपक को स्थिर सतह पर रखें और जलती लौ को कभी भी बिना निगरानी के न छोड़ें। ध्यान रखें कि इन उपायों का महत्व धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक आस्था पर आधारित है। दीपक जलाने से आर्थिक स्थिति या जीवन की समस्याओं में निश्चित बदलाव होने की वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।