अलगाववादी नेता यासीन मलिक समेत 7 लोगों के खिलाफ दिल्ली की विशेष एनआईए कोर्ट ने करीब 8.94 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश पाकिस्तानी एस्टैब्लिशमेंट से विदेशी फंडिंग लेने के आरोप में दिया है। स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने सात आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट में मौजूद सबूतों में इन सभी की मौजूदगी को तय किया है।
क्राइम से हुई कमाई
ED ने आरोप लगाया कि, 8.94 करोड़ रुपये की क्राइम से कमाई हुई और आरोपियों ने इसे हासिल किया और बाद में इसे अलग-अलग तरीकों से भेजा, ट्रांसफर किया, छिपाया, अपने पास रखा, हासिल किया और इस्तेमाल किया। इस पूरे मामले में आरोप लगाए गए हैं कि 8,94,87,639 रुपये आरोपियों ने कमाए। ईडी ने साल 2017 में NIA द्वारा दर्ज मामले की जांच की। इन मामलों में IPC की धाराएं 120 बी, 121 और 121 ए और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराएं 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 लगाई गई थी।
किसके खिलाफ ट्रायल शुरू
स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने शुक्रवार को अलगाववादी नेता यासीन मलिक मलिक समेत 7 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल का आदेश दिया। जिसमें 19 नवंबर से PAR का निर्देश दिया। कोर्ट के बंद रूम में सुनवाई हुई, जिसमें यासीन मलिक तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश हआ और खुद पर लगे आरोपों से इनकार करने लगा।
यासीन ने केस लड़ने की बात कही। स्पेशल NIA कोर्ट ने यासीन मलिक और 6 अन्य के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया था। अन्य आरोपी जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, और मसर्रत आलम भट हैं।
पीएमएलए के तहत के कार्रवाई
सुनवाई के दौरान मिले सबूतों के आधार पर पाकिस्तानी सरकार और दूसरे आतंकवादी संगठनों से अलग-अलग तरीकों और चैनलों से फंड लेने की बात सामने आई। जिससे वह अपनी सोच और अलगाववाद के एजेंडे और देश में कानून के खिलाफ़ विध्वंसक गतिविधियों को फैलाने के मंसूबे को पूरा कर सकें। स्पेशल जज का कहना है कि, पहली नज़र में रिकॉर्ड के तौर पर पर काफी ज्यादा सबूत हैं।
जिसके आधार पर सभी 7 आरोपियों, यानी ज़हूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, मेसर्स ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड, मोहम्मद यासीन मलिक , शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम और अब्दुल राशिद शेख के खिलाफ संदेह बरकरार रहा। इसके लिए इन आरोपियों पर PMLA की धारा 3 के तहत जुर्म का आरोप लगाया जाना चाहिए, जिसकी सज़ा PMLA की धारा 4 के तहत है।
आतंकवादी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल था यासीन
नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन से पैसे इकट्ठा किए और यासीन मलिक समेत हुर्रियत लीडरशिप को पैसे दिए , ताकि वे तोड़-फोड़ वाली एक्टिविटीज़ और जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत से अलग कर सकें। ED ने क्राइम की कमाई का पता लगाने के लिए 14.06.2017 को मौजूदा एनफोर्समेंट कंप्लेंट दर्ज की। ED का आरोप है कि आरोपी यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का हेड था, जो 1990 के दशक से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल एक संगठन है ।
गुलाम मोहम्मद भट, जो जहूर अहमद शाह वटाली के साथ कैशियर-कम-अकाउंटेंट के रूप में काम करता था, के घर से जब्त दस्तावेज़ से पता चला कि विदेशी योगदान आरोपी मोहम्मद यासीन मलिक , आरोपी शब्बीर अहमद शाह और आरोपी मसर्रत आलम ने वित्तीय वर्ष 2015-2016 के दौरान आरोपी जहूर अहमद शाह वटाली के माध्यम से प्राप्त किए थे।
ईमेल से मिली जानकारी
आरोप यह भी है कि यासीन मलिक के इस्तेमाल किए गए ईमेल से मिले और भेजे गए ईमेल से पता चलता है कि उसने आज़ादी की लड़ाई के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी, अलगाववादी और दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंड जुटाने के लिए दुनिया भर में एक बड़ा स्ट्रक्चर और सिस्टम बनाया था। और उस फंड का इस्तेमाल न सिर्फ अपने संगठन JKLF को चलाने के लिए किया गया।
बल्कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और हिंसा फैलाने के लिए भी किया गया। NIA ने अपनी दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बताया था कि आरोपी यासीन मलिक को सऊदी अरब से INR 15,75,595 की रकम मिली थी। इसलिए, आरोपी यासीन मलिक ने क्रिमिनल एक्टिविटी से कमाए गए 30,75,5951 रुपये के विदेशी फंड लिए और उसे आगे लॉन्ड्र किया।
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