नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे देश में मैन्युफैक्चरिंग, बुनियादी ढांचे, सेवाओं और नए कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

यह समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। इसके तहत न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय उत्पादों को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारतीय कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने और दूसरे देशों में अपने उत्पाद बेचने के नए अवसर मिलेंगे।

20 अरब डॉलर के निवेश से किन क्षेत्रों को होगा फायदा?

पीयूष गोयल के मुताबिक, न्यूजीलैंड की निवेश प्रतिबद्धता भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, बुनियादी ढांचे, सेवाओं और इनोवेशन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे उद्योगों के विस्तार, नई परियोजनाओं और कारोबार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इस निवेश से कृषि, स्टार्टअप और छोटे कारोबारों को भी फायदा पहुंच सकता है। हालांकि, निवेश किन कंपनियों और परियोजनाओं में, किस समय और किस अनुपात में आएगा, इसका वास्तविक असर निवेश के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

युवाओं के लिए क्या बदल सकता है?

किसी भी बड़े निवेश का असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। अगर इससे नई फैक्ट्रियां, व्यावसायिक इकाइयां और दूसरी परियोजनाएं शुरू होती हैं, तो उत्पादन, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और संबंधित सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

छोटे और मध्यम कारोबारों को भी नए बाजारों तक पहुंचने का मौका मिल सकता है। इससे कारोबार बढ़ने पर कर्मचारियों की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, फिलहाल इस निवेश से कितनी नौकरियां पैदा होंगी, इसका कोई निश्चित आंकड़ा सामने नहीं आया है।

भारतीय निर्यातकों को कैसे मिलेगा फायदा?

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत 20 अक्टूबर से न्यूजीलैंड में भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी बनाने और वहां के बाजार में उनकी मांग बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कपड़ा, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद और कृषि प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों के कारोबारियों को नए अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा, भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिलेगा।

किसानों के हितों का भी रखा गया ध्यान

समझौते में किसानों और घरेलू उत्पादकों के हितों को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। सरकार के अनुसार, डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को रियायतों से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों और संबंधित क्षेत्रों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

कुल मिलाकर, न्यूजीलैंड की 20 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता और मुक्त व्यापार समझौता भारत के लिए नए कारोबारी अवसर खोल सकता है। लेकिन इसका वास्तविक फायदा कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि निवेश कितनी तेजी से आता है और उससे देश में उत्पादन, निर्यात और रोजगार को कितना बढ़ावा मिलता है।

यह भी पढ़ें: जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर भागने लगा यात्री, अंडरगारमेंट में छिपा मिला 155 ग्राम सोने का पाउडर