नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और MP जयराम रमेश ने शुक्रवार 23, अक्टूबर को चीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चीन से जुड़े खतरे को नजरअंदाज कर रही है और चीन के प्रति लगातार रियायतें दे रही है। यह आरोप कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच चीन नीति को लेकर जारी राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
इंडो-तिब्बत बॉर्डर चुप्पी पर कांग्रेस नेता जयराम ने उठाए सवाल
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की चीन नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने बॉर्डर पर हो रहे तनाव पर केंद्र के चुप रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के डायरेक्टर जनरल ने अरुणाचल प्रदेश में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हाल ही में हुई झड़पों के दौरान फोर्स के कार्य की तारीफ की थी, जबकि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी है।
चीन द्वारा जगहों के नाम बदलने और 60,000 MW डैम पर चिंता जताई
जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में पेट्रोलिंग पॉइंट्स के नुकसान पर आरोप लगाते हुए कहा कि खुद को विश्वगुरु कहने वाले लोग चीन को सोची-समझी रियायतें दे रहे हैं। जबकि ITBP के DG ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ हुई झड़पों को लेकर सुरक्षाकर्मियों के परफॉर्मेंस की तारीफ की है और उसपर सरकार ने गहरी चुप्पी साध रखी है। इसके साथ ही कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीन द्वारा जगहों के नाम बदलने जाने और 60,000 MW के डैम के कंस्ट्रक्शन पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इससे भारत की इकोलॉजिकल और वॉटर सिक्योरिटी यानी पारिस्थितिक और जल सुरक्षा को खतरा है।
कांग्रेस नेता जयराम ने 'पेट्रोलिंग पॉइंट्स' के नुकसान का लगाया आरोप
ताकसिंग में झड़प के बाद पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर की बातचीत दौरान पता चला कि लद्दाख की तरह ही पेट्रोलिंग पॉइंट एक बार फिर खो गए हैं। उन्होंने चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे पर बात करते हुए दावा किया कि यह 2025-26 में रिकॉर्ड USD 112 बिलियन तक पहुंच गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में USD 99 बिलियन था। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2025-26 में और भी बढ़कर रिकॉर्ड $112 बिलियन हो गया, जो पिछले साल $99 बिलियन था। इसने कई इंडस्ट्रीज़ में हमारे MSMEs को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। मेक इन इंडिया अब चीन से इंपोर्ट बन गया है। यह बहुत बड़ा व्यापार घाटा अपने आप में हमारी आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।