नई दिल्ली: चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ECINet को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस सिस्टम का कंट्रोल दिल्ली में केंद्रीकृत होने से राज्यों में तैनात चुनाव अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी ने इसे ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जोड़ते हुए बीजेपी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है।

कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि ECINet के जरिए चुनावी डेटा पर केंद्रीय स्तर से नियंत्रण रखा जा सकता है। पार्टी का आरोप है कि इस व्यवस्था में राज्य के अधिकारियों की भूमिका सीमित हो सकती है और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। हालांकि, ये कांग्रेस के आरोप हैं, इन्हें चुनाव में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

ECINet के कंट्रोल पर क्यों उठ रहे सवाल?

ECINet चुनाव आयोग का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे चुनाव से जुड़े अलग-अलग ऐप और पोर्टल को एक व्यवस्था के तहत लाने के लिए शुरू किया गया था। इसके जरिए मतदाता सूची से जुड़े काम भी किए जाते हैं।

विवाद इस बात को लेकर है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड में बदलाव करने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है, क्या वे सिस्टम के जरिए अपने सभी कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर पा रहे हैं? रिपोर्टों के मुताबिक, ECINet में अधिकारियों की पहुंच और उनके काम करने की अनुमति केंद्रीय स्तर पर तय किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी चर्चा में

ECINet को लेकर विवाद के बीच गोवा का मामला भी सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के अधिकारियों ने 97 मतदाताओं के मामलों की जांच के बाद उन्हें मतदाता सूची में शामिल करने के योग्य पाया था। इसके बावजूद उन्हें अंतिम सूची में शामिल करने में तकनीकी परेशानी आई।

बताया गया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इस मामले में चुनाव आयोग से कई बार संपर्क किया। सवाल यह उठा कि जब स्थानीय स्तर पर अधिकारी किसी मतदाता को योग्य मान चुके थे, तो सिस्टम में उनके नाम दोबारा शामिल करने की सुविधा क्यों नहीं थी?

यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि इससे चुनावी सॉफ्टवेयर में तकनीकी नियंत्रण और जमीनी अधिकारियों के कानूनी अधिकारों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े हुए। हालांकि, इस मामले को अपने आप में पूरे चुनाव में ‘वोट चोरी’ का प्रमाण नहीं कहा जा सकता।

दो चुनाव आयुक्तों ने भी जताई थी चिंता

ECINet के केंद्रीकृत नियंत्रण को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियां भी चर्चा में रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों ने चुनावी डेटा के बढ़ते केंद्रीकरण और जमीनी स्तर के अधिकारियों की पहुंच सीमित होने पर चिंता जताई थी।

बताया गया कि दोनों आयुक्तों ने इस संबंध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं और मामला कैबिनेट सचिव तक भी पहुंचा था। चिंता यह थी कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने की जिम्मेदारी कानून के तहत निर्धारित अधिकारियों की है, इसलिए तकनीकी व्यवस्था उनके अधिकारों को सीमित नहीं करनी चाहिए।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने ECINet को विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म बताया है। आयोग के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और अन्य अधिकृत अधिकारी अपनी निर्धारित जिम्मेदारियां अलग-अलग आईडी और पासवर्ड के जरिए निभाते हैं।

आयोग ने यह भी कहा था कि ECINet की व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें IIT या IIIT का स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होगा। समिति यह जांच करेगी कि सिस्टम संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। आयोग के अनुसार, जरूरत पड़ने पर फील्ड अधिकारियों की सुविधा के लिए बदलाव भी किए जाएंगे।

कांग्रेस ने बीजेपी और चुनाव आयोग को घेरा

कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे जरूरी है और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर अधिकारियों को कानून के मुताबिक काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। पार्टी ने ECINet के कंट्रोल को लेकर उठे सवालों को अपने ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जोड़ते हुए जवाबदेही की मांग की है।

हालांकि, सिस्टम में केंद्रीकृत नियंत्रण का विकल्प होना और चुनाव में जानबूझकर गड़बड़ी होना दो अलग-अलग बातें हैं। कांग्रेस के आरोपों की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच और ठोस सबूत जरूरी हैं। ऐसे में इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की समीक्षा, अधिकारियों के अधिकारों की स्थिति और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर आने वाली जानकारी अहम होगी।

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