Amit Shah Birthday: भारतीय राजनीति की दिग्गज नेता यानी देश के गृह मंत्री अमित शाह का आज 62वां जन्मदिन है। उनका पूरा नाम अमित अनिलचंद्र शाह है। अमित शाह का नाम किसी पहचान का मोहताज नही है। अमित शाह अन्य नेताओं की तुलना में राजनीति क्षेत्र मे अपने खास अंदाज के कारण अक्सर सुर्खियों में छाए रहते हैं। गुजरात का गांधी नगर उनका लोकसभा क्षेत्र है।
वह साल 2014 से से 2020 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं। उनके राजनीतिक करियर की शुरूआत काफी दिलचस्प रही। 30 मई 2019 को अमित शाह ने 31वें केंद्रीय गृह मंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला। साल 2021 के जुलाई महीने में वह देश के पहले सहकारिता मंत्री भी बने।
RSS से जुड़े अमित शाह
वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई में 22 अक्तूबर 1964 को हुआ था। मुंबई के मानसा में गुजराती हिंदू बनिया परिवार में जन्मे अमित शाह का परिवार पीवीसी पाइप का व्यवसाय करता था। मेहसाणा में स्कूली शिक्षा प्राप्त की। सीयू शाह साइंस कॉलेज में जैव रसायन विज्ञान की पढ़ाई करने के लिए अमित शाह अहमदाबाद चले गए थे। जहां उन्होंने जैव रसायन में सन्नातक की उपाधि प्राप्त की।
फिर घर वापस लौटे और पिता का व्यवसाय में हाथ बटाने लगे। उन्होंने अहमदाबाद में एक स्टॉकब्रोकर और सहकारी बैंकों में भी काम किया था। अमित शाह बचपन से ही RSS के हिंदुत्व अर्धसैनिक स्वयंसेवी संगठन से जुडे। अहमदाबाद में अपने कॉलेज के दिनों में औपचारिक तौर पर आरएसएस के स्वयंसेवक बने। उन्होंने साल 1982 में अहमदाबाद में पहली बार नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
अमित शाह की उपलब्धियां
यह संयोग ही था कि जिस समय देश को आजादी मिली थी उस समय गुजरात से आने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल गृह मंत्री बने थे। अब देश जब अपने अमृतकाल में पहुंच चुका है तब भी देश में गुजरात के ही मंत्री के हाथों में गृह मंत्रालय की कमान है। अमित शाह के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी आई जिनका उन्होंने डट कर मुकाबला किया। देश के सेंसिटिव इलाके जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाना विपक्ष के लिए नामुंमकिन था,
लेकिन अमित शाह ने उसे हटाकर वहां के लोगों को खुलकर जीने का मौका दिया। अमित शाह के सामने वर्तमान समय में GENZ के आंदोलन को शांत करना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। क्योंकि पुलिस द्वारा आम लोगों के साथ जो बर्ताव किया गया, उसके बाद अमित शाह को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।
राजनीति में प्रवेश
शाह ने 1982 में आरएसएस में शामिल होने के बाद राजनीतिक सफर की शुरूआत की। इसी बीच आरएसएस के प्रचारक नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई। कथित तौर पर पीएम मोदी ने उन्हें आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल होने की सलाह दी थी। अमित शाह साल 1983 में एबीवीपी में शामिल हुए। साल 1987 में नरेंद्र मोदी की पार्टी में शामिल होने से पहले ही वह बीजेपी में शामिल हो चुके थे।
साल 1987 में भाजपा की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) के कार्यकर्ता बने। धीरे-धीरे बीजेवाईएम में उन्होंने वार्ड सचिव, तालुका सचिव, राज्य सचिव, उपाध्यक्ष और महासचिव सहित विभिन्न पदों को संभाला। साल 1991 के लोकसभा चुनावों के दौरान गांधीनगर में लाल कृष्ण आडवाणी के चुनाव अभियान प्रबंधक भी रहे। 1995 में, BJP ने गुजरात में अपनी पहली सरकार बनाई , जिसके मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल थे।
मोदी और शाह ने राज्य की शक्तिशाली सहकारी समितियों पर कांग्रेस के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी रणनीति का इस्तेमाल किया, जिसने राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मार्च 2025 में अमित शाह ने नक्सल विद्रोह को मार्च 2026 तक निपटाया। मार्च 2026 में लोकसभा में, उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक नक्सल मुक्त भारत है।
विवादों से रहा चोली दामन जैसा साथ
सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामला (2005)
वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति से जुड़े फर्जी मुठभेड़ और हत्या के मामलों में अमित शाह का नाम आया था। उस समय वे गुजरात के गृह मंत्री थे। इस मामले में उन्हें गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा था और कुछ समय के लिए उन्हें गुजरात से बाहर (तड़ीपार) भी रहना पड़ा था। हालांकि, दिसंबर 2014 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें इस मामले से पूरी तरह बरी (क्लीन चिट) कर दिया था।
2002 के गुजरात दंगे और नरोदा गाम केस
वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरोदा गाम नरसंहार मामले में उनका नाम सामने आया था, जिसमें उन्होंने बाद में अदालत में बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अपना बयान दर्ज कराया था।
वर्ष 2017 में एक न्यूज पोर्टल ने अमित शाह के बेटे जय शाह के कारोबार से जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसके बाद विपक्ष ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। अमित शाह और उनके बेटे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
ताज़ा राजनीतिक बयानबाजी और विवाद (अक्टूबर 2026)
हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दिए गए एक बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं और विवाद देखने को मिला है।इसके अलावा विपक्षी दलों (जैसे कांग्रेस) द्वारा उन पर चुनाव से पहले घुसपैठ और ध्रुवीकरण के मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करने के आरोप लगते रहे हैं।
बड़े विवादों और पुराने मुकदमों के समाधान
कानूनी क्लीन चिट: अदालतों द्वारा सोहराबुद्दीन मामले समेत अन्य कई मामलों में अमित शाह को राहत और क्लीन चिट मिल चुकी है।
पुराने अंतर-राज्यीय विवादों का निपटारा: गृह मंत्री के रूप में उन्होंने कई दशकों पुराने विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है।
असम और मेघालय के बीच 50 साल पुराने सीमा विवाद को समझौते के जरिए सुलझाया गया।
बिहार और झारखंड के बीच 25 साल पुराने सोन नदी जल विवाद का समझौता उनकी अध्यक्षता में कराया गया।
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