नई दिल्ली: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने शांति बांड भरने की प्रक्रिया को सामान्य रूप से स्वीकार करने का विरोध किया है। अखिल भारतीय छात्र संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शनिवार को इस प्रक्रिया और नागरिकों के असहमति जताने के अधिकार के बीच कथित विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया है।
शांति बनाए रखने के नाम पर शांति बांड भरने की शर्तें
इस संदर्भ में नेहा बोरा ने “मुख्य विरोधाभास” की ओर इशारा किया कि एग्जीक्यूटिव शांति बॉन्ड जारी कर रहा है, जबकि संविधान असहमति के अधिकार की इजाज़त देता है। उनका तर्क है कि शांति बनाए रखने के नाम पर शांति बांड भरने की शर्तें लोगों के विरोध दर्ज कराने और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता से टकरा सकती हैं।
AISA, शांति बॉन्ड पर साइन नहीं करेगा
अध्यक्ष नेहा बोरा ने ज़ोर देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध को रोकने के लिए शांति बॉन्ड का “हथियार” इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि CPI(ML) लिबरेशन की स्टूडेंट विंग AISA, शांति बॉन्ड पर साइन करने को “नॉर्मलाइज़” नहीं होगी। बोरा ने कहा कि ऐसे शांति बॉन्ड पर साइन करना असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार को “खत्म करने” से “कम नहीं” है।
पीस बॉन्ड डेमोक्रेटिक अधिकार को छोड़ने जैसा
नेहा बोरा ने कहा कि यह मुद्दा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन को लेकर बहस से जुड़ा है। उन्होंन अपनी बात रखते हुए कहा कि एक तरफ, संविधान हमें असहमति का अधिकार देता है। दूसरी तरफ, ऐसे पीस बॉन्ड का इस्तेमाल सिर्फ शांति भंग के नाम पर लोगों को हिरासत में लेने के लिए किया जाता है। इसलिए, ऐसे पीस बॉन्ड पर साइन करना हमारे लिए असल में गलत फैसला है और यह असहमति जताने के हमारे डेमोक्रेटिक अधिकार को छोड़ने जैसा है।
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