Gender Affirming Surgery: अपनी पहचान के मुताबिक जिंदगी जीने की चाह किसी इंसान के लिए कितनी अहम हो सकती है, इसकी एक मिसाल भोपाल के एम्स में सामने आई है। यहां एक ट्रांसजेंडर महिला की जटिल जेंडर अफर्मिंग सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। करीब 8 घंटे तक चले इस ऑपरेशन को सरकारी अस्पताल में अपनी तरह की पहली सर्जरी बताया जा रहा है। लेकिन इस खबर की सबसे खास बात सिर्फ सर्जरी की सफलता नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी एक महिला की पहचान और अपने जीवन को नए सिरे से जीने की इच्छा है।

14 साल तक पहचान की जद्दोजहद, फिर लिया बड़ा फैसला

बताया गया है कि मरीज ने करीब 14 साल तक पुरुष के रूप में जीवन बिताया, जबकि उनकी लैंगिक पहचान महिला की थी। अपनी पहचान के अनुरूप जिंदगी जीने की चाह उन्हें AIIMS भोपाल के ट्रांसजेंडर क्लीनिक तक ले आई। यहां पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को समझने के लिए काउंसलिंग की और जरूरी मेडिकल जांच कराई। इसके बाद सर्जरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस पूरे सफर में मरीज की इच्छा, सूचित सहमति और मेडिकल स्थिति को अहमियत दी गई।

8 घंटे तक चला ऑपरेशन, फिर क्या हुआ?

मरीज की सर्जरी चिकित्सकीय रूप से जटिल और संवेदनशील थी। विशेषज्ञों की टीम ने करीब आठ घंटे तक ऑपरेशन किया। सर्जरी पूरी होने के बाद मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। उनकी सेहत में संतोषजनक सुधार और स्थिति स्थिर होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सरकारी अस्पताल में इस तरह की सर्जरी की खबर इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे जेंडर अफर्मिंग हेल्थकेयर और ट्रांसजेंडर समुदाय की स्वास्थ्य जरूरतों पर चर्चा को नई दिशा मिल सकती है।

आखिर क्या होती है जेंडर अफर्मिंग सर्जरी?

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी को जेंडर कन्फर्मेशन सर्जरी भी कहा जाता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के शरीर की कुछ विशेषताओं को उसकी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाना होता है। इसमें वैजिनोप्लास्टी, ब्रेस्ट ऑगमेंटेशन और फेशियल फेमिनाइजेशन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। ट्रांसजेंडर पुरुषों के लिए चेस्ट सर्जरी, फैलोप्लास्टी और मेटोइडियोप्लास्टी जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है और सभी को एक जैसी सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती।

भारत में कितना आता है खर्च?

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी का खर्च सर्जरी के प्रकार, अस्पताल, सर्जन की विशेषज्ञता और मेडिकल जरूरतों पर निर्भर करता है। मिली जानकारी के मुताबिक
भारत में अलग-अलग प्रक्रियाओं का खर्च लगभग 2 लाख से 10 लाख रुपये तक हो सकता है। हालांकि ये अनुमानित कीमतें हैं, कोई तय दर नहीं। काउंसलिंग, मेडिकल टेस्ट, दवाइयां, अस्पताल में भर्ती रहने और सर्जरी के बाद फॉलोअप का खर्च अलग से जुड़ सकता है।

सर्जरी से आगे भी है एक बड़ी कहानी

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी केवल एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की जरूरतों और पहचान से जुड़ा संवेदनशील फैसला भी है। इसके लिए उचित काउंसलिंग, मेडिकल मूल्यांकन, सूचित सहमति और सर्जरी के बाद देखभाल जरूरी होती है। AIIMS भोपाल का यह मामला इसी बात को सामने लाता है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच किसी व्यक्ति को अपनी पहचान के अनुरूप जीवन जीने की दिशा में महत्वपूर्ण सहारा दे सकती है।

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