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मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे दुनिया की तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की शुरुआत कर दी है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से निर्यात होता है।
युद्ध का 13वां दिन
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को 13व दिन हो चुके हैं। बता दें कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। हाल ही में फारस की खाड़ी में छह जहाजों पर हमले हुए। इनमें थाईलैंड का मालवाहक जहाज मायुरी नारी भी शामिल था, जिसके इंजन कक्ष में विस्फोट हुआ। जहाज पर मौजूद 23 चालक दल के सदस्यों में से तीन अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा दो विदेशी तेल टैंकरों को अंडरवाटर ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई।
खामेनेई की सख्त चेतावनी
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, उनका कहना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहेंगे, तब तक इस रास्ते से तेल की आपूर्ति बाधित की जाएगी।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के 16 माइन बिछाने वाले जहाजों को नष्ट करने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना अब लगभग कमजोर हो चुकी है। हालांकि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट का कहना है कि फिलहाल नौसेना जहाजों को पूरी तरह सुरक्षा देने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन महीने के अंत तक एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू हो सकती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ ने अभी तक माइन बिछाने या विस्फोट की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलडमरूमध्य फिलहाल बेहद जोखिम भरा क्षेत्र बन चुका है और यहां पूरी सुरक्षा बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं। सऊदी अरामको ने भी चेतावनी दी है कि इससे तेल बाजार पर भारी असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने आपूर्ति संकट से निपटने के लिए बाजार में 40 करोड़ बैरल तेल जारी किया है, लेकिन इससे केवल करीब 26 दिनों की कमी ही पूरी हो पाएगी।
एशियाई देशों में बढ़ती चिंता
तेल आपूर्ति पर संकट का असर एशियाई देशों में भी दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान में स्कूल बंद कर दिए गए हैं, दक्षिण कोरिया में ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण लागू किया गया है और थाईलैंड में कई क्षेत्रों में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान असममित युद्ध रणनीति के जरिए अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, जिसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक रह सकता है।
इतिहास में भी हुआ है ऐसा
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान फारस की खाड़ी में ‘टैंकर वॉर’ देखने को मिला था, जब दोनों देशों ने एक-दूसरे के तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। उसी दौरान ईरान ने होर्मुज के आसपास समुद्री सुरंगें बिछाई थीं, जिनमें से एक अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस सैमुअल बी. रॉबर्ट्स से टकरा गई थी। इस घटना के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई युद्धपोतों और तेल प्लेटफार्मों को भारी नुकसान पहुंचाया था।
Written By Toshi Shah

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