
देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लाए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम मोड़ आने वाला है। सर्वोच्च न्यायालय आज यानी सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग की गई है। कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दाखिल इस याचिका ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या इस कानून को जनगणना और परिसीमन जैसी लंबी प्रक्रियाओं का इंतजार किए बिना ही अमल में लाया जा सकता है।
याचिका की मुख्य मांग
फिलहाल, महिला आरक्षण कानून में यह प्रावधान है कि इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) के बाद ही लागू किया जाएगा। याचिकाकर्ता का तर्क है कि देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम है। याचिका में कहा गया है कि सीटों की संख्या पहले से ही स्पष्ट है, इसलिए इसे जनगणना से जोड़ना केवल देरी करने का एक तरीका है। आज जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच इस कानूनी पेच पर गौर करेगी।
पीएम मोदी की अपील
यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने वाला है। खबर है कि सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण को तुरंत प्रभावी बनाने के लिए एक संशोधन बिल ला सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक कदम में साथ देने की अपील की है। पीएम का मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए नीति-निर्धारण में महिलाओं की सीधी और ज्यादा भागीदारी अनिवार्य है।
कांग्रेस और विपक्षी दल
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस विशेष सत्र के समय पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में विशेष सत्र बुलाना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है। कांग्रेस की मांग है कि सरकार को पहले परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और आम सहमति बनानी चाहिए। विपक्ष इस मामले में सरकार की मंशा पर भी सवाल उठा रहा है, जिससे सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं।
क्या बदलेगी भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर?
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और संसद के विशेष सत्र की कार्यवाही यह तय करेगी कि क्या भारतीय महिलाएं 2026 में ही अपने राजनीतिक अधिकारों को हासिल कर पाएंगी या उन्हें अभी और इंतजार करना होगा। यदि अदालत या सरकार तुरंत आरक्षण के पक्ष में फैसला लेती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे बड़े सुधारों में से एक होगा। पूरी दुनिया की नजरें आज की इस सुनवाई और आने वाले संसदीय सत्र पर टिकी हैं।
Written by: Anushka Sagar


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