
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को तेज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देश के विभिन्न राज्यों से 150 से अधिक न्यायाधीशों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भी इस काम में शामिल किया गया है। ये सभी अधिकारी दावों और आपत्तियों की सुनवाई, दस्तावेजों की जांच और अंतिम निर्णय देने में जुटे हुए हैं।
भाषा बाधा बनकर आया सामने
हालांकि, इतने बड़े स्तर पर न्यायिक व्यवस्था लगाए जाने के बावजूद सबसे बड़ी बाधा भाषा बनकर सामने आई है। एसआईआर से जुड़े अधिकतर फॉर्म, कागजात और गवाहों के बयान बांग्ला में हैं, जिन्हें दूसरे राज्यों से आए न्यायाधीश सीधे समझ नहीं पा रहे हैं। एक बाहरी राज्य से आए न्यायाधीश ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन सैकड़ों फाइलें देखनी पड़ती हैं, जो बांग्ला में होती हैं। ऐसे में हर मामले को समझने के लिए अनुवाद का सहारा लेना पड़ता है। जानकारी के मुताबिक, काम में रुकावट न आए इसलिए कई न्यायाधीशों को निजी अनुवादकों की मदद लेनी पड़ रही है।
मतदाता सूची सोमवार की जाएगी जारी
भाषा की इस समस्या का असर काम की गति पर भी पड़ सकता है। अनुवाद पर निर्भरता बढ़ने से मामलों के निपटारे में देरी होने की आशंका है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहली पूरक मतदाता सूची सोमवार को जारी की जाएगी, जिसमें सही पाए गए दावों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद अपील और ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया पूरी कर अंतिम सूची तैयार होगी।
इस प्रकार है एसआईआर की मौजूदा स्थिति
कुल दावे और आपत्तियां 60 लाख से अधिक हैं, जिनमें से लगभग 27 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है। करीब 63 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि लगभग 30 लाख मामले अभी पुनर्विचार या प्रक्रिया में हैं। बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और हटाने का काम जारी है।
Written By Toshi Shah

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