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Harish Rana: सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद 31 वर्षीय हरीश राणा की इच्छामृत्यु की अंतिम यात्रा में उनका परिवार मेडिकल और आध्यात्मिक मार्गदर्शन दोनों पर भरोसा कर रहा है। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सिस्टर लवली ने कहा कि इस कठिन समय में मन को शांत रखना आम व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता।
हरीश राणा का कोमा और अस्पताल में अंतिम समय
हरीश राणा पिछले 12 सालों से कोमा में थे। उन्हें उनके गाजियाबाद स्थित घर से दिल्ली के एम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां वे अंतिम सांस लेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सिस्टर लवली हरीश के माथे पर तिलक लगाते हुए कहती दिखीं, 'सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए, सो जाओ… ठीक है।'
आध्यात्मिक मार्गदर्शन ने दिया परिवार को बल
सिस्टर लवली ने बताया कि हरीश और उनका परिवार पिछले 13 वर्षों से ब्रह्माकुमारी से जुड़े रहे। उन्होंने कहा, 'परिवार को आध्यात्मिक रूप से जो शक्ति और साहस मिलता था, वह उन्होंने अपने परिवार के साथ साझा किया। इस कठिन समय में यही ताकत उन्हें सहारा देती रही।' तीन साल पहले हरीश से मिलने पर सिस्टर लवली ने कहा, 'उनका माथा तेज़ी से चमक रहा था, जबकि शरीर बहुत कमजोर था। यह एक आध्यात्मिक अनुभव था। उनके भीतर एक महात्मा का वास है, यह आपके तपस्या का परिणाम है।'
माता-पिता का निर्णय और परिवार की मजबूती
हरीश की मां ने कहा, 'मैं इसकी मुक्ति चाहती हूं,' जबकि पिता थोड़े पीछे हटते रहे। सिस्टर लवली ने बताया कि मां की दृढ़ता और मेहनत के कारण ही यह निर्णय संभव हुआ। उन्होंने आगे कहा, 'यह मामला न केवल परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी उदाहरण बन गया है। फॉरगेट एंड फॉरगिव, मानसिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा इस समय सबसे ज्यादा मदद कर रही है।'
अंतिम संदेश और प्रार्थना
सिस्टर लवली ने कहा, 'इतना बड़ा निर्णय लेना आसान नहीं है। हम सभी इस दर्द को महसूस कर रहे हैं। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना करेंगे कि परिवार को शक्ति मिले। जो लोग इसे देख रहे हैं, वे भी अपने अंदर ठहराव और शांति बनाए रखें।'
Writen By: Geeta Sharma

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