
दिल्ली में आबकारी नीति को लेकर चल रहे गंभीर मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के कुछ अहम पहलुओं को सही तरीके से नहीं समझा और उसके निर्णय में ग़लतियाँ हैं। इसी याचिका पर अब 9 मार्च को सुनवाई होगी, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय दोनों पक्षों के तर्क सुनेगा।
क्यों घेरा गया ट्रायल कोर्ट का फैसला
दिल्ली में आबकारी नीति विवाद, CBI की याचिका 9 मार्च को सुनी जाएगी, ट्रायल कोर्ट को भी घेरा
दिल्ली में आबकारी नीति मामले में CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। 9 मार्च को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। जानिए केस के अहम बिंदु और CBI के तर्क।
CBI का दावा: वास्तविक तथ्यों पर ध्यान नहीं
CBI का आरोप है कि ट्रायल कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण सबूतों को दरकिनार किया और उन पर विचार नहीं किया जो जांच एजेंसी के मुताबिक पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकते थे। एजेंसी का कहना है कि अदालत ने केवल तकनीकी बातों पर ज़्यादा ध्यान दिया और वास्तविक तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया। इसीलिए उसने फैसला चुनौती देने का निर्णय लिया है।
क्या कहा CBI ने अपनी याचिका में
CBI ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में जो सबूत हाथ लगे हैं, वे पर्याप्त हैं और उन पर फैसले में ध्यान देना जरूरी था। याचिका में यह भी जोड़ा गया है कि जांच एजेंसी की जांच और उसके निष्कर्षों का सही अर्थ लगाकर ही निर्णय होना चाहिए था, न कि केवल कुछ दस्तावेज़ों के आधार पर।
अब हाईकोर्ट में फैसले पर होगी बहस
अब 9 मार्च को होने वाली सुनवाई में दिल्ली उच्च न्यायालय CBI वाक्य और ट्रायल कोर्ट के बीच उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगा। दोनों पक्ष अपने तर्क पेश करेंगे और अदालत तय करेगी कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में सुधार की आवश्यकता है या नहीं। अदालत का यह कदम भ्रष्टाचार मामलों में न्याय की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हाईकोर्ट का फैसला
कानून के जानकारों का कहना है कि CBI की यह याचिका न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है और उच्च न्यायालय को सभी तथ्यों को ध्यान से परखना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक यदि ट्रायल कोर्ट के फैसले में वाकई कमज़ोरियाँ थीं, तो उच्च न्यायालय का ध्यान उन्हें दूर करना आवश्यक है। वहीं कुछ का कहना है कि दोनों पक्षों के मजबूत तर्क सुनने के बाद ही सही निष्कर्ष निकल सकता है।
Written by : Anushka sagar

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