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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां IED विस्फोट की चपेट में आने से जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के 4 जवान शहीद हो गए। जबकि एक अन्य जवान घायल हो गया। यह घटना कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा से लगे घने वन क्षेत्र में हुई। जो लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है।
Chhattisgarh | Four District Reserve Guard (DRG) personnel lost their lives in an IED blast near the Kanker-Narayanpur district border today.
— ANI (@ANI) May 2, 2026
As per IG Bastar P Sundarraj, "Security forces are continuously recovering Maoist dumps containing IEDs, weapons, arms, ammunition,… https://t.co/kNTWN4rH0g pic.twitter.com/0Tdbk9FKKQ
सर्च ऑपरेशन मिशन पर निकली थी सुरक्षा बलों की टीम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों की एक टीम इलाके में सर्च ऑपरेशन और बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने के मिशन पर निकली थी। इस दौरान उन्हें माओवादियों के एक ठिकाने की सूचना मिली थी, जहां भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, हथियार और अन्य उपकरण छिपाकर रखे गए थे। इसी सूचना के आधार पर टीम जंगल के भीतर गहराई तक पहुंची और एक संदिग्ध स्थान की तलाशी शुरू की।
पहले से जमीन में मौजूद था विस्फोटक: सूत्र
सुरक्षाबलों को अभियान के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्री बरामद हुई थी। हालांकि, जब टीम एक अन्य संदिग्ध स्थान की ओर बढ़ी, तभी अचानक एक आईईडी विस्फोट हो गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह विस्फोटक पहले से जमीन में दबाकर रखा गया था और सुरक्षा बलों की गतिविधि के दौरान सक्रिय हो गया।
धमाके में शहीद हुए 4 जवान
इस धमाके में 4 जवान मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल जवान को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। अधिकारियों ने बताया कि घायल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सर्च ऑपरेशन में जुटी
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने घटना के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और संभावित नक्सली ठिकानों की जांच की जा रही है। साथ ही, बम निरोधक दस्तों को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि इलाके में मौजूद अन्य विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया जा सके।
स्थानीय प्रशासन ने की जंगल में न जाने की अपील
स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जंगलों या संदिग्ध क्षेत्रों में जाने से बचें और किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत पुलिस को दें। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं और सतर्कता बरतना अब भी बेहद जरूरी है।
31 मार्च को नक्सलवाद से मुक्त राज्य घोषित किया था
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में 31 मार्च को राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया था। ऐसे में इस प्रकार की घटना सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही नक्सल गतिविधियों में कमी आई हो, लेकिन जंगलों में पहले से बिछाए गए आईईडी और बारूदी सुरंगें अब भी बड़ा खतरा बनी हुई हैं।
Written By: Geeta Sharma

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