
गाजियाबाद में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एंटीबायोटिक दवाओं का गलत तरीके से निस्तारण एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) यानी सूक्ष्मजीवों की दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का खतरा बढ़ा सकता है। लोग अक्सर घर पर बची दवाओं को गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं, जिससे बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों में प्रतिरोधकता विकसित हो सकती है। यह समस्या केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
दवाओं के सुरक्षित निस्तारण की जरूरत
डॉक्टरों ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं को सुरक्षित और जिम्मेदारी से नष्ट करना बेहद जरूरी है। निवारक उपायों में दवाओं की निर्धारित मात्रा का ही सेवन करना और समाप्त हो चुकी दवाओं को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र या फार्मेसी में लौटाना शामिल है। गलत निस्तारण से न केवल पर्यावरण पर असर पड़ता है बल्कि AMR जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ता है।
AMR का बढ़ता खतरा और वैश्विक प्रभाव
एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस धीरे-धीरे वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि दवाओं का गलत इस्तेमाल और निस्तारण जारी रहा तो भविष्य में आम संक्रमण भी कठिन इलाज वाले बन सकते हैं। इस स्थिति में नई दवाओं और इलाज पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
जागरूकता और सामुदायिक प्रयास
इस खतरे से निपटने के लिए नागरिकों में जागरूकता फैलाना और समुदाय स्तर पर दवाओं के सुरक्षित निस्तारण को बढ़ावा देना आवश्यक है। डॉक्टरों ने सुझाव दिया कि अस्पताल और फार्मेसियों में ड्रॉपबॉक्स या कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाएँ ताकि पुरानी दवाओं को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जा सके। यह कदम AMR के खतरे को कम करने और समाज में स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगा।
Written by : Anushka sagar

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