
नवरात्री का पावन पर्व चल रहा है, सनातन धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है. नवरात्री के दौरान मां भगवती के नौ रूपों की अराधना की जाती है. वहीं नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इनका जन्म महर्षि कात्यायन के घर हुआ था, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा. शास्त्रों में देवी कात्यायनी के स्वरूप का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि वे चार भुजाधारी हैं. माता के एक हाथ में तलवार, दूसरे में पुष्प तो तीसरा हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा वर मुद्रा में है. मां कात्यायनी की सवारी सिंह है. मान्यता है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तो को मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह पूजा शत्रु संहार की शक्ति प्रदान करती है. मां कात्यायनी संतान प्राप्ति का भी वरदान प्रदान करती हैं. मां कात्यायनी की पूजा से व्यक्ति को अलौकिक तेज और प्रभाव प्राप्त होता है। और वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी समस्याएं दूर होती हैं.
मां कात्यायनी की कथा
पुराणों के अनुसार, एक वनमीकथ नाम के महर्षि थे, उनका एक पुत्र था जिसका नाम कात्य रखा गया. इसके बाद कात्य गोत्र में महर्षि कात्यायन ने जन्म लिया, उनकी कोई संतान नहीं थी. उन्होंने मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें साक्षात दर्शन दिया. उसके बाद महर्षि कात्यायन ने माता से वरदान मांगा कि वह उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें. मां भगवाती ने भी उन्हें वचन दिया कि वह उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लेंगी.
एक बार तीनों लोकों पर महिषासुर नाम के एक दैत्य ने अत्याचर करना शुरु कर दिया. उसके अत्यचारों से तंग आकर सभी देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी से सहयता मांगी. तब त्रिदेव के तेज से माता ने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया. इसलिए माता के इस स्वरूप को कात्यायनी के नाम से जाना जाने लगा. माता के पुत्री के रूप में पधारने के बाद महर्षि कात्यायन ने सबसे पहले उनकी पूजा की. तीन दिनों तक महर्षि की पूजा स्वीकार करने के बाद माता ने वहां से विदा ली और महिषासुर, शुंभ निशुंभ समेत कई राक्षसों के आतंक से संसार को मुक्त कराया. माता कात्यायनी को ही महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है.
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मां और भगवान श्रीकृष्ण
कहा जाता है कि ब्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए मां कात्यायनी की पूजा की थी. मां कात्यायनी की पूजा में लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह रंग शक्ति, प्रेम और उत्साह का प्रतीक है. मां कात्यायनी को शहद बहुत प्रिय है, इसलिए शहद का भोग लगाएं. और "कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः" का मंत्र पढ़े, जिसका अर्थ है, हे महामाया, महायोगिनी, नंदगोप के पुत्र को पति रूप में प्रदान करो.
Published By- Nandani Gurung