
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर दिन भर चर्चा होने के बाद आखिरकार आधी रात को यह पास हो गया। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इस बिल को लोकसभा में पेश किया था। इस बिल पर चर्चा के लिए वैसे तो 8 घंटे का समय रखा गया था लेकिन चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए समय को बढ़ा दिया गया। सरकार की तरफ से चर्चा का जवाब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने दिया। किरेन रिजीजू के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पर वोटिंग हुई और फैसला सरकार के पक्ष में आया। इससे पहले सत्तारूढ़ दल बीजेपी ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर आज सदन में मौजूद रहने को कहा था। इसी तरह से TDP, JDU, RLD ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया था। वक्फ विधेयक-2025 पर लगभग 12 घंटे तक चली बहस का जवाब देते हुए मंत्री रिजिजू ने कहा की, पारसी जैसे छोटे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी भारत में सुरक्षित हैं और यहां सभी अल्पसंख्यक गर्व के साथ रहते हैं.
लोकसभा में वक्फ बिल को लेकर अमित शाह ने कसा तंज
वहीं लोकसभा में मौजूद केंद्र मंत्री अमित शाह ने बिल पर बहस के दौरान कहा कि हमने वक्फ के साथ कोई छेड़ा छड़ी नहीं की है। वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद के लिए संशोधन किया है. इसकी फंक्शनिंग प्रशासनिक है. सरकार का काम वक्फ बोर्ड को धार्मिक क्रियाकलाप नहीं करना है. हम मुतवल्ली को छू भी नहीं रहे हैं. वहीं, असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में वक्फ बोर्ड बिल का विरोध करते हुए कहा कि ये अनुच्छेद 25, 26 का उल्लंघन है. वक्फ बिल मुस्लिमों के साथ अन्याय है. इतना ही नहीं उन्होंने बिल की कॉपी को फाड़ने की बात भी कही.
वक्फ बहस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने जताया ग़ुस्सा
असदुद्दीन ओवैसी को तंज कस्ते हुए, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रिजिजू ने कहा- अगर हमने आज यह संशोधन बिल पेश नहीं किया होता, तो जिस इमारत में हम बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में नहीं आती तो कई अन्य संपत्तियां भी गैर-अधिसूचित हो गई होतीं। आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट पहली बार बना। उस समय स्टेट वक्फ बोर्ड का भी प्रावधान किया गया था। उस वक्त से कई संशोधनों के बाद 1995 में वक्फ एक्ट बना। उस वक्त किसी ने नहीं कहा कि ये गैरसंवैधानिक है। आज जब हम उसी बिल को सुधारकर ला रहे हैं तो आप कह रहे हैं कि यह गैरसंवैधानिक है।
वक्फ बिल को लेकर पार्टियों ने दिखाया समर्थन
आपको बता दे, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल भाजपा के सहयोगी दलों जद(यू), तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जनसेना और जनता दल (सेक्यूलर) ने वक्फ संशोधन का समर्थन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया। इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ गया है. सरकार इसे पारित कराने के लिए तैयार है, वहीं विपक्ष इसे असंवैधानिक बता रहा है. अब जल्द ही इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।