
कराची में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने रविवार और सोमवार की मध्यरात्रि के आसपास अफगानिस्तान के तीन अलग-अलग प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों का निशाना प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और जमात-उल-अहरार के ठिकाने थे। दूसरी ओर, अफगान पक्ष का आरोप है कि बमबारी का असर मुख्य रूप से रिहायशी इलाकों पर पड़ा, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान गई और कई लोग घायल हुए।
स्थानीय रिपोर्टों में ये बात आई सामने
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई घायल लोगों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है। वहीं पाकिस्तान के अधिकारियों ने दावा किया है कि अभियान में दर्जनों आतंकवादी मारे गए हैं।
किन क्षेत्रों में हुए हमले?
बताया जा रहा है कि हवाई हमले अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के गियान क्षेत्र, पक्तिया प्रांत के चमकानी इलाके और कुनार प्रांत के मरवारा क्षेत्र में किए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हमले रिहायशी मकानों और एक मस्जिद के आसपास हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले विस्फोट के बाद जब ग्रामीण राहत और बचाव के लिए पहुंचे, तो कुछ समय बाद दोबारा बमबारी हुई, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा
हमले में घायल एक व्यक्ति ने बताया कि घटना के समय वहां किसी प्रकार की सैन्य गतिविधि नहीं थी। उसके अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में केवल स्थानीय नागरिक मौजूद थे और हमले में आम लोगों को नुकसान पहुंचा। उसने कहा कि कई लोग मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे थे, तभी दूसरा हमला हुआ, जिससे राहत कार्य में जुटे लोग भी उसकी चपेट में आ गए।
अन्य घायल निवासी ने कही ये बात
एक अन्य घायल निवासी ने बताया कि वह कुछ समय पहले विदेश से अपने गांव लौटा था। उसके अनुसार, पहले उसके पड़ोसी के घर पर हमला हुआ और उसके बाद बचाव कार्य में लगे लोगों पर दोबारा बमबारी की गई, जिससे कई लोगों की मौत और अनेक अन्य घायल हो गए।
दोनों देशों के दावे
पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य सीमा पार सक्रिय आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था। वहीं अफगानिस्तान की ओर से आरोप लगाया गया है कि आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया, जिसके कारण आम लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, दोनों देशों के दावों में स्पष्ट अंतर है और घटनाओं से जुड़ी कई जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी भी आवश्यक है। इसलिए हताहतों की संख्या, हमले के वास्तविक लक्ष्य और घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग पक्षों की बातों को सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए।
Written By Toshi Shah















