
Champat Rai Resignation: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पद से इस्तीफा देने के बाद एक बार फिर उनका लंबा सार्वजनिक जीवन चर्चा में आ गया है। राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाने वाले चंपत राय ने शिक्षा के क्षेत्र से अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। वर्ष 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना के समय उन्हें महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके इस्तीफे के साथ यह सवाल भी चर्चा में है कि ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालने से पहले उनका सफर कैसा रहा।
केमेस्ट्री प्रोफेसर के रूप में की थी करियर की शुरुआत
चंपत राय ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर स्थित RSM डिग्री कॉलेज में केमेस्ट्री प्रोफेसर के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कुछ वर्षों तक अध्यापन कार्य किया और छात्रों को रसायन विज्ञान पढ़ाया। हालांकि, उनका झुकाव सामाजिक कार्यों और संगठनात्मक गतिविधियों की ओर लगातार बढ़ता गया। यही कारण रहा कि उन्होंने बाद में शिक्षण सेवा छोड़कर पूर्णकालिक सार्वजनिक जीवन को अपनाने का निर्णय लिया।
इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तारी ने बदली जीवन की दिशा
साल 1975 में देश में लागू आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के कारण चंपत राय को गिरफ्तार कर लिया गया था। बताया जाता है कि उन्हें सीधे कॉलेज से हिरासत में लिया गया और उन्होंने लगभग 18 महीने जेल में बिताए। यह दौर उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने अध्यापन कार्य छोड़ दिया और पूर्णकालिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बन गए।
संघ और विश्व हिंदू परिषद में निभाईं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
पूर्णकालिक प्रचारक बनने के बाद चंपत राय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 1991 में उन्हें अयोध्या भेजा गया, जहां उन्होंने अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में विश्व हिंदू परिषद में उन्होंने केंद्रीय सचिव, संयुक्त महासचिव, अंतरराष्ट्रीय महासचिव और उपाध्यक्ष जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक अनुभव के कारण वे परिषद के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
राम जन्मभूमि आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
चंपत राय कई दशकों तक राम जन्मभूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। मंदिर विवाद से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों, अभिलेखों और अन्य प्रमाणों को एकत्रित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन दस्तावेजों का उपयोग अदालत में हिंदू पक्ष की ओर से कानूनी प्रक्रिया के दौरान किया गया। वे विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल के करीबी सहयोगियों में भी गिने जाते रहे और आंदोलन से जुड़े अनेक अभियानों का हिस्सा रहे।
महासचिव बनाए जाने के पीछे था लंबा अनुभव
अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में 15 सदस्यीय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले इस ट्रस्ट में चंपत राय को महासचिव नियुक्त किया गया। इसके पीछे राम जन्मभूमि आंदोलन से उनका दशकों पुराना जुड़ाव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद में संगठनात्मक अनुभव तथा मंदिर आंदोलन से जुड़े अभिलेखों और समन्वय कार्य में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रमुख कारण माना गया।
इस्तीफे के बाद चर्चा का विषय बनें चंपत राय
चंपत राय का सार्वजनिक जीवन शिक्षा, संगठन और सामाजिक गतिविधियों के विभिन्न चरणों से होकर गुजरा है। एक केमेस्ट्री प्रोफेसर के रूप में करियर शुरू करने वाले चंपत राय बाद में राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हुए और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी निभाई। उनके इस्तीफे के बाद एक बार फिर उनका यह लंबा सफर चर्चा का विषय बन गया है।
Written By: Geeta Sharma















