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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी के सामने पार्टी को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हाल के घटनाक्रमों ने न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को 19 जून को मुलाकात के लिए समय दिया है। माना जा रहा है कि यह बैठक पार्टी में चल रही बगावत और उससे जुड़े विवादों को समझने तथा स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से बुलाई गई है।
TMC सांसदों के NCPI में शामिल होने से बदली राजनीतिक समीकरण
तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों द्वारा पार्टी से अलग होने और पूर्वोत्तर की राजनीतिक पार्टी NCPI में विलय की घोषणा ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। यह पार्टी त्रिपुरा की एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी। हालांकि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था और उसके दोनों उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे।
ओर बढ़ सकती है तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें
पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और आंतरिक असंतोष ने तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दावा किया जा रहा है कि लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग राह पकड़ ली है। बागी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसकी अगुवाई शताब्दी रॉय कर रही हैं, लोकसभा अध्यक्ष से मिलने से पहले भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव से भी मिला था। इस मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
संकट केवल लोकसभा तक सीमित नहीं
संकट केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा में भी पार्टी को झटके लगे हैं। हाल ही में प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी पार्टी से दूरी बना चुके हैं। सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी छोड़ने के बाद आरजी कर अस्पताल मामले को लेकर नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए थे, जबकि सुष्मिता देव ने असम की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
अभिषेक बनर्जी और ओम बिरला की मुलाकात महत्वपूर्ण
ऐसे समय में अभिषेक बनर्जी और ओम बिरला की प्रस्तावित मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह बैठक न केवल संसदीय स्थिति को स्पष्ट कर सकती है, बल्कि टीएमसी के भविष्य की दिशा भी तय कर सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से बचाने में कितनी सफल होती हैं और क्या टीएमसी इस राजनीतिक संकट से उबर पाएगी।
Written By: Geeta Sharma

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