
पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली रही टीएमसी के लिए हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी अब विपक्ष की भूमिका में है। इसी बीच वित्तीय वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट ने टीएमसी की आर्थिक स्थिति को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं।
तृणमूल कांग्रेस के पास बैंकों में भारी मात्रा में धनराशि जमा
31 मार्च 2025 तक की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार,तृणमूल कांग्रेस के पास बैंकों में भारी मात्रा में धनराशि जमा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के विभिन्न बैंक खातों में कुल 625 करोड़ 79 लाख 87 हजार 264 रुपये मौजूद हैं। इसके अलावा पार्टी ने 250 करोड़ 77 लाख 28 हजार 322 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) भी कर रखी है। इस तरह बैंक बैलेंस और एफडी को मिलाकर टीएमसी की कुल बैंकिंग संपत्ति 876 करोड़ 57 लाख 15 हजार 586 रुपये तक पहुंच जाती है।
आंकड़ों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पार्टी के पास 50 करोड़ रुपये के चेक मौजूद हैं। वहीं केंद्रीय और क्षेत्रीय कार्यालयों में कुल 31 लाख 28 हजार 28 रुपये नकद रखे जाने का भी जिक्र किया गया है। इन आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने की थी TMC की स्थापना
तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने की थी। कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाई थी,जिसने कुछ ही वर्षों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में मजबूत पहचान बना ली। वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं। इसके बाद लगातार तीन कार्यकाल तक उन्होंने राज्य की सत्ता संभाली।
2026 में पश्चिम बंगाल में हुआ ऐतिहासिक उलटफेर
हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और भाजपा ने राज्य की सत्ता हासिल कर ली। सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी के सामने संगठनात्मक चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। पार्टी के कई सांसदों और विधायकों के असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं,जबकि कुछ नेताओं के बागी रुख अपनाने की भी चर्चा है।
ऑडिट रिपोर्ट में टीएमसी की स्थिति आर्थिक रूप से मजबूत
एक ओर जहां ऑडिट रिपोर्ट टीएमसी की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाती है,वहीं दूसरी ओर चुनावी हार और बढ़ती अंदरूनी चुनौतियां पार्टी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रही हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टीएमसी विपक्ष में रहते हुए खुद को किस प्रकार पुनर्गठित करती है और जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को दोबारा मजबूत बना पाती है या नहीं।
Written By: Geeta Sharma















