
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही कूटनीतिक बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जून को दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समझौते की घोषणा की। इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। समझौते के तहत अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जबकि ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ शामिल होंगे।
तीन चरणों में लागू होगा समझौता
पहला चरण: प्रारंभिक समझौते की घोषणा
14 जून को जारी समझौता ज्ञापन (MoU) के अनुसार दोनों पक्षों के बीच जारी सैन्य गतिविधियों को तत्काल रोकने पर सहमति बनी है। साथ ही ईरान पर लागू समुद्री प्रतिबंधों में ढील देने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
दूसरा चरण: 30 दिनों के भीतर उठाए जाने वाले कदम
समझौते के प्रभावी होने के बाद एक महीने के अंदर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नौवहन के लिए खोलने की योजना है। इसके अलावा ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्तियों में से लगभग 12 अरब डॉलर जारी किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
तीसरा चरण: 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया
दो महीने के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसी अवधि में शेष 12 अरब डॉलर भी ईरान को उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव है।
समझौते की प्रमुख शर्तें
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित MoU में कुल 14 बिंदु शामिल हैं। इनमें क्षेत्रीय सैन्य अभियानों की समाप्ति, ईरान की संप्रभुता का सम्मान, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, समुद्री मार्गों को खोलना तथा परमाणु गतिविधियों पर वार्ता जैसे विषय शामिल हैं।
प्रस्ताव के अनुसार:
- लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा।
- 60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी किया जाएगा. इसमें से आधा पैसा बातचीत शुरू होने से पहले ही जारी हो जाएगा।
- -ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और इस्लामी गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान होगा।
- अमेरिका 30 दिन के भीतर ईरान के आसपास से सेना को वापस बुलाएगा।
- ईरानी व्यवस्था के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति मिलेगी. नौसैनिक नाकाबंदी को हटाया जाएगा।
- ईरान को अपने परमाण हथियार न बनाने के वादे पर कायम रहना होगा।
- अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करने की शर्त भी शामिल है।
- ईरान तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित निर्यातों पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित करने का प्रस्ताव है. जिससे तेहरान को इससे होने वाली आय पर पूरा अधिकार मिल सके।
- चर्चा केवल एनरिच्ड यूरेनियम के भविष्य, संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक पुनर्निर्माण तक ही सीमित रहेगी।
- ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और सहयोगी सशस्त्र समूहों को दिए जा रहे समर्थन को एजेंडा से बाहर रखा जाएगा।
- शांति समझौते पर बातचीत के दौरान अमेरिका क्षेत्र में अतिरिक्त सेना की तैनाती नहीं करेगा और न ही नए प्रतिबंध लगाएगा।
- समझौते को पूरा करने के लिए एक मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाएगा, इससे इसके कार्यान्वयन पर नजर रखी जाएगी।
- फाइनल हुए समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से मंजूरी दी जाएगी।
- ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कही ये बात
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि यह समझौता मध्य पूर्व में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देगा, उन्होंने दावा किया कि समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाएगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलेगी।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इस शांति समझौते को MoU नाम दिया है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, 'ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर जीत हासिल कर ली है. तेहरान के लोगों के समर्थन और सेना के अथक प्रयासों के चलते कई महीनों की कठिन और लंबी बातचीत के बाद 14 जून की शाम को ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच शांति समझौते को अंतिम रूप दिया गया है.'
19 जून को होंगे समझौते पर हस्ताक्षर
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 19 जून को जेनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह अमेरिका और ईरान के संबंधों में कई वर्षों बाद एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ माना जाएगा।
Written By Toshi Shah

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