.jpg)
Health News: अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग 60 से 70 साल की उम्र में भी ऊर्जा से भरपूर दिखाई देते हैं। उनकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। दरअसल, उनकी फिटनेस का राज उनकी डेली रूटीन में छिपा होता है।
सोच और आदतों में छिपा है फिटनेस का राज
कई लोगों को लगता है कि ऐसे लोग शायद बेहतर जीन के साथ पैदा हुए होंगे, लेकिन साइकोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की रिसर्च कुछ अलग ही कहानी बताती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, असली फर्क सोच और आदतों का होता है। जब चलना-फिरना और छोटे-छोटे काम करना 'वर्कआउट' की तरह न लगकर रोजमर्रा का सामान्य हिस्सा बन जाता है, तो दिमाग उसे बोझ नहीं समझता। यही वजह है कि ऐसी आदतें लंबे समय तक बनी रहती हैं।
सीढ़ियां व्यायाम नहीं, बल्कि दिनचर्या की प्रक्रिया होती है
एशिया के कई शहरों में देखा गया है कि जो बुजुर्ग बिना लिफ्ट वाले घरों में रहते हैं, वे अक्सर ज्यादा सक्रिय और फिट दिखाई देते हैं। वे सीढ़ियां चढ़ते समय इसे व्यायाम नहीं मानते, बल्कि इसे घर जाने की सामान्य प्रक्रिया समझते हैं। यही मनोवैज्ञानिक पहलू गतिविधि को आसान बना देता है, क्योंकि जब काम का उद्देश्य फिटनेस नहीं बल्कि दिनचर्या होता है, तो उसे टालने की संभावना कम हो जाती है।
छोटे कामों को भी सक्रिय बनाना
आज के समय में हम किराने से लेकर फर्नीचर तक लगभग हर चीज ऑनलाइन मंगवा लेते हैं। इसके विपरीत, कई सक्रिय बुजुर्ग अभी भी बाजार पैदल जाते हैं, साइकिल से सब्जियां लाते हैं और अपना सामान खुद उठाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पैदल चलना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है और ज्यादातर लोग इसे समझते भी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग इसे अपनी जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बना लेते हैं।
बागवानी जो बन जाता है व्यायाम
बागवानी करने वाले बुजुर्गों को देखें तो वे झुकते हैं, उठते हैं, मिट्टी खोदते हैं और गमले उठाते हैं। यह अपने आप में पूरे शरीर के लिए एक प्राकृतिक वर्कआउट बन जाता है, लेकिन उन्हें ऐसा महसूस नहीं होता। जैसे साइकिलिंग, बैडमिंटन या टेनिस—वे लंबी उम्र से भी जुड़ी पाई गई हैं।
शौक चुनते हैं, जिम नहीं
फिट रहने वाले कई वरिष्ठ नागरिक डांस क्लास, बैडमिंटन, वॉकिंग ग्रुप या टेबल टेनिस जैसे शौक अपनाते हैं। ये गतिविधियां उन्हें व्यायाम की तरह नहीं बल्कि मनोरंजन की तरह महसूस होती हैं, इसलिए वे नियमित रूप से इन्हें जारी रख पाते हैं।
छोटी-छोटी हरकतों का बड़ा असर
वैज्ञानिक इसे 'नॉन-एक्सरसाइज एक्टिविटी थर्मोजेनेसिस' कहते हैं। इसका मतलब है दिनभर की वे छोटी-छोटी गतिविधियां जो बिना औपचारिक व्यायाम के होती हैं जैसे फोन पर बात करते समय टहलना, टीवी देखते हुए खड़े हो जाना या घर में इधर-उधर चलते रहना। दरअसल, लंबी उम्र और बेहतर ऊर्जा का रहस्य कठिन एक्सरसाइज में नहीं, बल्कि दिनभर की निरंतर हल्की-फुल्की सक्रियता में छिपा होता है। जब चलना-फिरना जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन जाता है, तब फिट रहने के लिए अलग से प्रयास करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
Writen By: Geeta Sharma

.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)
.jpg)
.jpg)