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साफ दिन में आकाश हमेशा नीला दिखता है, लेकिन सूर्योदय या सूर्यास्त के समय यह नारंगी, गुलाबी और लाल रंगों में रंग जाता है। ऐसा कोई जादू नहीं है, बल्कि यह सूरज की रोशनी और पृथ्वी के वायुमंडल का कमाल है। इंडिया टुडे साइंस की नई सीरीज में हम रोजमर्रा की ऐसी घटनाओं को सरल तरीके से समझाएंगे। आज जानते हैं कि दिन के अलग-अलग समय में आकाश का रंग क्यों बदलता है।
दिन में आकाश नीला क्यों होता है?
दिन में सूरज ऊपर होता है, इसलिए उसकी रोशनी वायुमंडल से कम दूरी तय करती है। नीली रोशनी, जिसकी तरंगें छोटी होती हैं, चारों तरफ ज्यादा फैलती है। जब हम ऊपर देखते हैं, तो वही बिखरी नीली रोशनी हमारी आंखों तक पहुंचती है, इसलिए आकाश नीला दिखाई देता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त में आकाश लाल-नारंगी क्यों दिखता है?
सूर्योदय या सूर्यास्त के समय, सूरज क्षितिज के पास होता है, इसलिए उसकी रोशनी को वायुमंडल में लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इस दौरान रोशनी ज्यादा गैस और धूल कणों से टकराती है, जिससे नीली और बैंगनी किरणें बिखर जाती हैं और हमारी आंखों तक नहीं पहुंचती। वहीं, लाल, नारंगी और पीली किरणें लंबी तरंगों वाली होती हैं, इसलिए वे सीधे हमारे पास आती हैं और आकाश को सुंदर सूर्योदय या सूर्यास्त का रंग देती हैं।

आकाश के रंग का रहस्य
आकाश का अपना कोई रंग नहीं होता। जो रंग हमें दिखाई देता है, वह सूरज की रोशनी का वायुमंडल में बिखराव (स्कैटरिंग) है। सूरज की रोशनी सफेद दिखती है, लेकिन इसमें सभी रंगों की तरंगें (वेवलेंथ) होती हैं। नीले और बैंगनी रंग की तरंगें छोटी होती हैं, जबकि लाल और नारंगी की तरंगें लंबी। जब सूरज की रोशनी वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो यह नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसी छोटी गैस अणुओं से टकराती है। ये अणु छोटी तरंगों (नीला और बैंगनी) को ज्यादा फैलाते हैं। इस प्रक्रिया को रेली स्कैटरिंग कहते हैं, जिसे 19वीं सदी में भौतिक विज्ञानी लॉर्ड रेली ने समझाया था।
Written By - Namita Verma

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