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चीन ने घोषणा की है कि वह 1 मई 2026 से अपने साथ राजनयिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों से आयात पर जीरो टैरिफ लागू करेगा। सरकारी मीडिया के अनुसार यह कदम अफ्रीका के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने और महाद्वीप में अपनी वरीयतापूर्ण व्यापार नीति का विस्तार करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पहले चीन 33 अफ्रीकी अल्प-विकसित देशों (LDC) के लगभग 97–98% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता था, जिसे 2024 में सभी उत्पादों तक बढ़ा दिया गया था। नया फैसला अब लगभग पूरे अफ्रीका पर लागू होगा, सिवाय इस्वातिनी के, जो ताइवान के साथ राजनयिक संबंध रखता है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के अफ्रीकन ग्रोथ एंड ऑपर्च्युनिटी एक्ट (AGOA) के नवीनीकरण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक साझेदारी समझौतों पर तनाव जारी है।
अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने किया था चीन का यात्रा
हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने चीन की यात्रा की और व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाया। इसके परिणामस्वरूप दक्षिण अफ्रीका के व्यापार मंत्री पार्क्स टाउ और चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ ने एक गैर-बाध्यकारी रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए। उम्मीद है कि मार्च 2026 तक ‘अर्ली हार्वेस्ट एग्रीमेंट’ को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे दक्षिण अफ्रीकी निर्यातकों को चीनी बाजार में शून्य-शुल्क लाभ मिलेगा।
अफ्रीकी ने इन चीजों का किया निर्यात
जनवरी से अगस्त 2025 के बीच चीन-अफ्रीका व्यापार 15.4% बढ़कर 222.05 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान चीन का अफ्रीका को निर्यात 24.7% बढ़कर 140.79 अरब डॉलर हुआ, जबकि अफ्रीका से आयात केवल 2.3% बढ़कर 81.25 अरब डॉलर रहा। नतीजतन, 2025 के पहले आठ महीनों में अफ्रीका का व्यापार घाटा 59.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया। अफ्रीकी देशों से मुख्य रूप से कच्चे तेल, तांबा, कोबाल्ट और लौह अयस्क जैसे संसाधन चीन को निर्यात किए जाते हैं, जबकि चीन से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण अफ्रीका में आयात होते हैं। जुलाई 2024 से जून 2025 के बीच अफ्रीका ने चीन से 15,032 मेगावाट सौर पैनल खरीदे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 60% अधिक है।
1.4 अरब डॉलर के टैरिफ का त्याग करेगा चीन
विशेषज्ञों के अनुसार इस नीति से चीन लगभग 1.4 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व का त्याग करेगा। हालांकि, गैर-टैरिफ बाधाएं, नियामकीय मानक, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सीमाएँ अफ्रीकी निर्यातकों के लिए चुनौती बनी रहेंगी।
written by- Toshi Shah

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