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जब भी आप कोई नई गाड़ी खरीदने का प्लान करते है, तो माइलेज सबसे बड़ा सवाल होता है। खासतौर पर यह चर्चा सबसे ज्यादा होती है कि आखिर Diesel Cars, Petrol Cars के मुकाबले ज्यादा माइलेज क्यों देती हैं। हाईवे ड्राइव हो या लंबी दूरी की जर्नी, डीजल कारें अक्सर बेहतर एवरेज देने के लिए जानी जाती हैं। इसकी वजह सिर्फ कीमत या इंजन का साइज नहीं, बल्कि डीजल फ्यूल और इंजन की बनावट होती है। अगर आप भी यह समझना चाहते हैं कि डीजल कार माइलेज के मामले में पेट्रोल से आगे क्यों रहती है, जानें इस खबर के माध्यम से-
डीजल फ्यूल में है ज्यादा एनर्जी
बात की जाए डीजल कार की तो यह ज्यादा माइलेज देत ही है, वजह डीजल फ्यूल में मौजूद ज्यादा एनर्जी है। पेट्रोल के मुकाबले डीजल में प्रति लीटर ज्यादा एनर्जी होती है। इसका मतलब यह है कि डीजल इंजन उसी मात्रा के फ्यूल से ज्यादा दूरी तय कर सकता है। यही कारण है कि डीजल कारें कम फ्यूल में लंबा सफर तय कर लेती हैं और माइलेज बेहतर निकलता है।
ज्यादा कम्प्रेशन रेशियो
पेट्रोल इंजन की तुलना में डीजल इंजन ज्यादा कम्प्रेशन रेशियो पर काम करते हैं। जहां पेट्रोल इंजन आमतौर पर 8:1 से 12:1 कम्प्रेशन पर चलता है, वहीं डीजल इंजन 20:1 या उससे भी ज्यादा कम्प्रेशन इस्तेमाल करता है। ज्यादा कम्प्रेशन का फायदा यह होता है कि फ्यूल ज्यादा अच्छे से और पूरी तरह जलता है। जब फ्यूल पूरी तरह बर्न होता है, तो हर बूंद से ज्यादा पावर मिलती है और माइलेज अपने आप बढ़ जाता है।
कम्प्रेशन इग्निशन टेक्नोलॉजी
पेट्रोल इंजन में फ्यूल को जलाने के लिए स्पार्क प्लग की जरूरत होती है, जबकि डीजल इंजन में ये Process अलग होती है। डीजल इंजन में हवा को बहुत ज्यादा दबाया जाता है, जिससे उसका तापमान इतना बढ़ जाता है कि डीजल फ्यूल अपने आप जलने लगता है। इस तकनीक को कम्प्रेशन इग्निशन कहा जाता है। इससे फ्यूल ज्यादा कंट्रोल में और बेहतर तरीके से जलता है, जिससे फ्यूल की बर्बादी कम होती है और माइलेज ज्यादा मिलता है।
written by- Toshi Shah


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