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ज्यादातर लोग अपने बचत के पैसें को बैंक अकाउंट में ही जमा कराते हैं। इसके अलावा भी लोग सेविंग्स को बैंक में जमा करते है साथ ही एफडी और आरडी में भी निवेश करते हैं, लेकिन क्या होगा जब आपको यह पता चले की जिस बैंक में आप अपनी कमाई जमा कर रहे हैं, उस बैंक का दिवालिया हो गया है। ऐसे में लोगों का सबसे पहला यह सवाल उठता है कि हमरा पैसा सुरक्षित है या नहीं। इस डर को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) और उसकी सब्सिडियरी संस्था डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन की ओर से जरूरी जानकारी दी गई है। ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर बैंक डूब जाए तो ग्राहकों को कितना पैसा मिलता है और RBI का नियम क्या है?
जानें क्या हैं RBI का नियम?
RBI और DICGC के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल मार्च 2025 तक देश के करीब 97.6 प्रतिशत बैंक खाते बीमा कवर के दायरे में आते हैं। यानी अगर कोई बैंक डूब भी जाता है, तो ऐसे में खाताधारकों को उनकी जमा राशि वापस मिलने की उम्मीद रहती है। RBI के नियमों के अनुसार DICGC हर जमाकर्ता को एक बैंक में अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर देता है। जिसमें सेविंग अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट, फिक्स्ड डिपॉजिट और करंट अकाउंट शामिल होते हैं. इसके अलावा बीमा कवर पर सीमा रखा गया है, जिसमें 5 लाख तक राशि वापस हो जाता है। लेकिन 5 लाख से ज्यादा पर बैंक की दिवालियापन प्रक्रिया लागू होती है। बता दें कि बैंक की संपत्ति बेचकर अन्य जमाकर्ताओं को पैसा लौटाने की कोशिश की जाती है, लेकिन इसमें समय लग सकता है।
बैंक डूबने पर कहां से मिलता है पैसा?
अगर कोई बैंक अपने जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने की स्थिति में नहीं होता तो RBI उस पर मोरेटोरियम लगा सकता है या उसे किसी दूसरे बैंक में मर्ज कर सकता है। वहीं पूरी तरह रास्ता बंद होने पर बैंक को दिवालिया भी घोषित किया जाता है। ऐसी कंडीशन में DICGC अपने बीमा फंड से जमाकर्ताओं को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की रकम लौटाता है। यह फंड बैंकों से लिए जाने वाले इंश्योरेंस प्रीमियम से तैयार किया जाता है।
written by- Toshi Shah


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