
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुतों से जुड़े मामलों पर लगातार दूसरे दिन ढाई घंटे तक सुनवाई करते हुए कुत्तों के बिहेवियर को लेकर चर्चा की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने सड़को से सभी कुत्तों को हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है। अदालत ने कहा कि उसका निर्देश सिर्फ इतना है कि आवारा कुत्तों के साथ एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के अनुसार ही व्यवहार किया जाए। यानी कुत्तों को मारना या जबरन हटाना नहीं, बल्कि उनका इलाज और देखभाल नियमों के तहत होनी चाहिए।
तीन जजों की बेंच ने की सुनवाई
इस केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की विशेष पीठ कर रही थी, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया शामिल थे। यह बेंच उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जो कुत्ता प्रेमियों और अन्य पक्षों द्वारा दायर की गई थीं। इनमें पहले दिए गए आदेशों में बदलाव और उनके सही तरीके से पालन की मांग की गई थी।
कुत्तों के व्यवहार पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहना है कि कुत्ते अक्सर उन लोगों को पहचान लेते हैं जो उनसे डरते हैं या जिन्हें पहले कुत्ते ने काटा हो। ऐसे मामलों में कुत्ते उन लोगों पर हमला कर सकते हैं। अदालत ने यह बात यह समझाने के लिए कही कि समस्या को वैज्ञानिक और व्यवहारिक तरीके से सुलझाना जरूरी है।
वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुनी गईं
इस सुनवाई में देश के कई वरिष्ठ वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। इनमें सी. यू. सिंह, कृष्णन वेणुगोपाल, ध्रुव मेहता, गोपाल शंकरनारायणन, श्याम दीवान, सिद्धार्थ लूथरा और करुणा नंदी शामिल थे। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल ने बताया कि चार राज्यों ने इस मामले में अपने अनुपालन हलफनामे अदालत में दाखिल कर दिए हैं।
कुत्तों को हटाने से चूहों का खतरा बढ़ेगा
वरिष्ठ वकील सी. यू. सिंह ने दलील दी कि अगर कुत्तों को अचानक सड़कों से हटा दिया गया, तो इससे चूहों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहरों में पहले से ही चूहों और बंदरों की समस्या है। चूहों की बढ़ती आबादी से गंभीर बीमारियां और नुकसान हो सकता है। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन होती हैं और बिल्लियां चूहों को मारती हैं, इसलिए शायद ज्यादा बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए।
नसबंदी और वैक्सीनेशन पर जोर
वकील सिंह ने कहा कि वे कोर्ट के आदेशों का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनमें सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना था कि आवारा कुत्तों की समस्या का सबसे असरदार समाधान नसबंदी, टीकाकरण और उसी इलाके में उन्हें वापस छोड़ना है।
अस्पतालों में कुत्तों को लेकर सवाल
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सवाल उठाया। बेंच ने पूछा कि अस्पतालों के कॉरिडोर, वार्ड और मरीजों के बेड के पास आखिर कितने कुत्ते घूमने चाहिए। कोर्ट ने संकेत दिया कि सार्वजनिक और संवेदनशील जगहों पर संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
Saurabh Dwivedi

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