बीते साल 2025 दिसंबर में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में वह राज्य सरकार की ओर से नियुक्ति पत्र वितरण कर रहे थें। तभी उन्होंने एक महिला डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब हटाने को लेकर विवादों में आ गए थे। वहीं अब खबर आ रही है कि इस महिला डॉक्टर ने आखिरकार अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली है।
जानकारी के लिए बता दें कि इस खबर की पुष्टि बांका के सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने की है। उन्होंने बताया कि नुसरत परवीन ने सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर आधिकारिक रूप से अपनी ड्यूटी संभाल ली है।
6 जनवरी को पूरी हुई ज्वाइनिंग प्रक्रिया
सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह के अनुसार, डॉक्टर नुसरत परवीन का मेडिकल चेकअप 6 जनवरी को पूरा हुआ था। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने उसी दिन अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट जमा कर दी। हालांकि, यह मामला संवेदनशील होने की वजह से सिविल सर्जन ने मीडिया के सामने ज्यादा बयान देने से बचते हुए सिर्फ ज्वाइनिंग की पुष्टि की।
कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?
यह मामला बीते साल 15 दिसंबर के आसपास का है जब बिहार सरकार की तरफ से नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में सीएम नीतिश कुमार मंच पर डॉक्टर नुसरत परवीन को नियुक्ति पत्र दे रहे थे। तभी उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नुसरत परवीन के चेहरे से हिजाब हटाने की कोशिस की। यह घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मचा हंगामा
वीडियो वायरल होते ही इस पर तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे एक महिला की निजता और धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना शुरू हो गई।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
वीडियो सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत कई विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के व्यवहार पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का कहना था कि सार्वजनिक मंच पर किसी महिला अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है और यह महिला के सम्मान और धार्मिक पहचान से जुड़ा मामला है।
बिहार की राजनीति में गरमाया मुद्दा
इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में कई दिनों तक घमासान मचा रहा। विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री से माफी की मांग करता रहा और इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर मीडिया तक उठाया गया।
विवाद के बाद अब सामान्य हुई स्थिति
अब डॉक्टर नुसरत परवीन द्वारा नौकरी ज्वाइन कर लेने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर शांत होता दिख रहा है। फिलहाल वह अपने चिकित्सा कार्यों में जुट गई हैं और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।
महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस
इस पूरे मामले ने एक बार फिर महिला सम्मान, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कई लोगों का मानना है कि सरकारी मंचों पर सभी अधिकारियों के साथ समान और सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
Saurabh Dwivedi



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