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प्रयागराज में हर साल लगने वाला माघ मेला करीब 45 दिनों तक चलता है। 2026 में माघ मेला का पहला स्नान 3 जनवरी को मनाया गया। वहीं दूसरा प्रमुख स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन किया जाएगा। मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का शुभ समय माना जाता है।
मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।
स्नान का शुभ मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त
मकर संक्रांति के दिन पुण्य काल और महापुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:20 बजे तक रहेगा। वहीं, शास्त्रों के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से 5:44 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान करने से विशेष पुण्य फल मिलता है।
माघ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़
माघ मेले के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर ही 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था। मकर संक्रांति के अवसर पर करीब 1 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने का अनुमान है। मकर संक्रांति का यह स्नान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, साधना और आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है।
- YUKTI RAI

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