
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शुक्रवार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें जमानत प्रदान कर दी। यह जमानत प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) द्वारा दर्ज मामलों में दी गई है।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, हाई कोर्ट ने करोड़ों रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई के बाद चैतन्य बघेल की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत में आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने पक्ष रखा, जबकि उनकी सहायता एडवोकेट मयंक जैन, हर्षवर्धन, परगनिहा और मधुर जैन ने की।
शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के दिन गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत की गई थी। इससे पहले राज्य की जांच एजेंसी ने भी सितंबर महीने में उन्हें इसी मामले में गिरफ्तार किया था, हालांकि उस समय वे पहले से ही न्यायिक हिरासत में थे।
2019–2022 के बीच शराब घोटाले का आरोप
ईडी का दावा है कि छत्तीसगढ़ में यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित घोटाले से राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि शराब कारोबार से जुड़े एक कथित सिंडिकेट को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस कथित शराब घोटाले के सिंडिकेट का प्रमुख चेहरा थे और उन्होंने घोटाले से प्राप्त लगभग एक हजार करोड़ रुपये की रकम का प्रबंधन किया। वहीं, एसीबी/ईओडब्ल्यू का दावा है कि आरोपी को अपने हिस्से के तौर पर करीब 200 से 250 करोड़ रुपये मिले। एजेंसियों के अनुसार, जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस कथित घोटाले से कुल अवैध कमाई 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद चैतन्य बघेल को इस मामले में बड़ी राहत जरूर मिली है, हालांकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रहेगी।
Saurabh Dwivedi




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