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सनातन धर्म में माघ मास को सबसे पवित्र और पुण्य देने वाला महीना माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस महीने में किया गया स्नान, दान और जप व्यक्ति के जीवन को शुद्ध करता है। मान्यता है कि माघ मास में नियमपूर्वक स्नान करने से जन्म-जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं और मन को शांति मिलती है।
प्रयागराज में आस्था का संगम
हर वर्ष उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2026 में यह मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान करने के लिए आते हैं। यह मेला आस्था, विश्वास और सनातन परंपरा का जीवंत रूप माना जाता है।
माघ स्नान का शास्त्रीय महत्व
पुराणों और धर्मग्रंथों में माघ स्नान को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। कहा गया है कि माघ मास में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर फल मिलता है। यह स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी पवित्र करता है।
तन, मन और आत्मा की शुद्धि
माघ स्नान का उद्देश्य सिर्फ बाहरी शुद्धि नहीं है। शास्त्रों के अनुसार इस समय देव शक्तियां पृथ्वी पर आती हैं, जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र हो जाता है। ऐसे में किया गया स्नान व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति देता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
मोक्ष की ओर एक सरल मार्ग
माघ स्नान को मोक्ष प्राप्ति का आसान उपाय माना गया है। जो व्यक्ति पूरे श्रद्धा भाव और विधि-विधान से स्नान करता है, उसके जीवन के कष्ट कम होते हैं। यह स्नान इंसान को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर सही मार्ग की ओर ले जाता है।
दान, जप और संयम का विशेष फल
शास्त्रों में बताया गया है कि माघ मास में किया गया दान, जप और तप कई गुना फल देता है। यदि स्नान के साथ व्यक्ति सत्य, संयम और सेवा को अपनाता है, तो उसका जीवन सुख और सफलता से भर जाता है।
भगवान विष्णु की विशेष कृपा
मान्यता है कि माघ स्नान करने वाले व्यक्ति पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है। इससे न केवल वर्तमान जीवन के पाप कटते हैं, बल्कि भविष्य भी शुभ और कल्याणकारी बनता है।
- YUKTI RAI

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