बर्न (स्विट्जरलैंड)। स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में संसद के पास 200 से अधिक तिब्बतियों और उनके समर्थकों ने चीन की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चीन पर तिब्बत में सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान को कमजोर करने वाली नीतियां अपनाने का आरोप लगाया।
तिब्बती संगठनों के संयुक्त आयोजन
यह प्रदर्शन सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के अनुसार, तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रंगजेन के आत्मदाह की घटना के 44वें दिन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन 14 अगस्त को कई तिब्बती संगठनों के संयुक्त आयोजन में हुआ, जिसमें स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन की तिब्बती कम्युनिटी, स्विस तिब्बतन फ्रेंडशिप एसोसिएशन (GSTF), स्विस तिब्बतन महिला संघ, यूरोपियन तिब्बतन यूथ एसोसिएशन और Swiss V-TAG शामिल थे।
प्रदर्शन में तिब्बती समुदाय के नेताओं, पूर्व तिब्बती सांसदों, तिब्बत ब्यूरो के पूर्व प्रतिनिधियों और जिनेवा स्थित तिब्बत ब्यूरो के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, लोबगा रंगजेन के चित्र के सामने पारंपरिक स्कार्फ अर्पित किए, तिब्बती राष्ट्रगान गाया और तिब्बती शहीदों की याद में एक मिनट का मौन रखा। इस दौरान शांति के लिए प्रार्थना भी की गई।
CTA ने चीन की नीतियों पर उठाए सवाल
सभा को संबोधित करते हुए तिब्बत ब्यूरो की प्रतिनिधि थिनले चुक्की ने कहा कि लोबगा रंगजेन का आत्मदाह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान देने का संकेत है। उन्होंने कहा कि CTA के रिकॉर्ड के अनुसार, 2009 से अब तक तिब्बत के अंदर आत्मदाह के 157 मामले सामने आ चुके हैं।
चुक्की ने चीन के "Ethnic Unity and Progress Law" की आलोचना करते हुए कहा कि यह कानून तिब्बत की सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान के लिए खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए मंदारिन भाषा को बढ़ावा दिया जा रहा है, तिब्बती मठों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और चीन के बाहर तिब्बत समर्थकों पर भी असर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और स्विट्जरलैंड से अपील
CTA प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र से चीन और तिब्बत में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग की। उन्होंने स्विट्जरलैंड से बीजिंग पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने और वहां के सांसदों से तिब्बत के मानवाधिकार मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे में बनाए रखने की अपील की।
थिनले चुक्की ने सवाल उठाते हुए कहा, "आज हम यहां इसलिए एकत्र हुए हैं क्योंकि एक तिब्बती ने न्यूयॉर्क में आत्मदाह किया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंखें खुलने से पहले कितने और तिब्बतियों को यह अंतिम बलिदान देना होगा?"
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CTA ने कहा कि यह प्रदर्शन तिब्बतियों के मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और उनकी संस्कृति, भाषा व पहचान को बचाने के लिए जारी वैश्विक समर्थन को दर्शाता है। चुक्की ने उम्मीद जताई कि एक दिन दलाई लामा ल्हासा के पोटाला पैलेस लौटेंगे और वहां फिर से उपदेश देंगे।
मुख्य बिंदु:
- स्विट्जरलैंड में चीन की नीतियों के खिलाफ 200 से ज्यादा लोगों का प्रदर्शन
- तिब्बत में सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बचाने की मांग
- CTA ने चीन के नए कानून पर जताई चिंता
- संयुक्त राष्ट्र से जांच के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की अपील
- प्रदर्शन में तिब्बती मानवाधिकार और स्वतंत्रता के मुद्दे उठाए गए
Written By: Pradeep Singh