Los Angeles : लॉस एंजिल्स की मेयर करेन बास अपने राजनीतिक करियर के सबसे कड़े पुनर्निर्वाचन मुकाबले का सामना कर रही हैं। जून 2026 के प्राथमिक चुनाव के बाद, उनका मुकाबला 3 नवंबर 2026 को होने वाले रन-ऑफ आम चुनाव में नगर पार्षद नित्या रमन से है। क्योंकि ऑनलाइन फर्जी सर्वेक्षणों और मनगढ़ंत डेटा के प्रसार ने राजनीतिक गलत सूचनाओं से जुड़ी चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मीडिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनहोंने पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर घोषणा की थी। जिसमें उन्होंने बताया कि एक नए सर्वेक्षण से पता चलता है कि उनका अभियान गति पकड़ रहा है। कुछ ही दिनों के अंदर खुलासा हुआ कि- सर्वेक्षण फर्जी था। कैलिफोर्निया के नतीजे 3 राज्यों में किए गए। कम से कम तीन सर्वेक्षणों में से एक थे, जिन्हें इस महीने मीडियन स्ट्रैटेजीज नामक एक अज्ञात संगठन ने ऑनलाइन प्रकाशित किया था।

ऐसे हुआ खुलासा

मीडियन स्ट्रैटेजीज ने एक समाचार पत्र को बताया कि, यह नतीजे फर्जी थे। इस सप्ताह अपनी वेबसाइट बंद करने से पहले, कंपनी ने लिखा कि इसे एक कम अवधि वाले सामाजिक प्रयोग के रूप में बनाया था। इसमें जांच की गई थी कि जनमत सर्वेक्षण संबंधित जानकारी स्वतंत्र सत्यापन के बगैर राजनीतिक सूचना तंत्र में कैसे प्रवेश कर गई और फेल हो गई। पोस्ट में यह नहीं बताया गया कि, इस प्रयोग को किसने अपने उद्देश्य के लिए किया था। वहीं एक समाचार एजेंसी ने इस वेबसाइट के पीछे कॉलेज के 21 वर्षीय स्नातक के छात्र का हाथ बताया था। राहिल प्रकाश ने फोन पर उसी समाचार एजेंसी को बताया कि, मैं देखना चाहता था कि क्या फर्जी चुनाव सर्वेक्षण इतनी आसानी से सिस्टम में घुसपैठ कर सकते हैं और यह संभव था। कैलिफोर्निया में हुए जनमत सर्वेक्षण के स्वरूप अप्रमाणित जनमत सर्वेक्षणों पर भरोसा करने के खतरों के बारे में एक चेतावनी भरी कहानी प्रस्तुत करता है।


बास और रमन के बीच कड़ी टक्कर

पिछले सप्ताह जारी लॉस एंजिल्स के मतदाताओं के एक सर्वेक्षण में मेयर करेन बास को काउंसिल सदस्य नित्या रमन से व्यापक और बढ़ते अंतर से आगे पाया गया। कुछ दिन पहले, विस्कॉन्सिन के डेमोक्रेटिक गवर्नर पद के प्राथमिक चुनाव के एक सर्वेक्षण में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट फ्रांसेस्का हांग ने मिल्वौकी काउंटी के कार्यकारी डेविड क्रॉली को 20 प्रतिशत से अधिक अंकों से हराया था। विस्कॉन्सिन के प्राइमरी चुनाव में क्रॉली ने हांग को आसानी से हरा दिया। वहीं, लॉस एंजिल्स की इस दौड़ के अन्य सर्वेक्षणों में बास और रमन के बीच कड़ी टक्कर दिखाई दे रही है।

मीडिया एजेंसी को मिला था ईमेल

यह जनमत सर्वेक्षणों की एक गड़बड़ी का मामला नहीं था, बल्कि ये सर्वेक्षण फर्जी थे। और सर्वेक्षण करने वाली कंपनी भी फर्जी थी। मीडिया एजेंसी ने खुलासा करते हुए बताया यह सब एक परीक्षण था। मीडियन स्ट्रैटेजीज़ को एक अल्पकालिक सामाजिक प्रयोग के रूप में बनाया गया था ताकि यह जांचा जा सके कि कथित जनमत सर्वेक्षण संबंधी जानकारी स्वतंत्र सत्यापन के बिना राजनीतिक सूचना तंत्र में कैसे प्रवेश कर सकती है और फैल सकती है, कंपनी ने मीडिया एजेंसी को भेजे गए एक ईमेल में कहा। हम प्रचार या इसमें शामिल व्यक्तियों के लिए श्रेय की मांग नहीं कर रहे हैं और साक्षात्कार देने से इनकार कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर परिणामों का जश्न मनाया

यह प्रयोग कुछ हद तक सफल रहा। कैलिफोर्निया पोस्ट ने लॉस एंजिल्स में हुए मतदान पर रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए एक शीर्षक में (जिसे बाद में हटा दिया गया) घोषणा की कि प्राथमिक चुनाव में रियलिटी टीवी स्टार स्पेंसर प्रैट का समर्थन करने वाले मतदाता बास के लिए चुनाव का नतीजा तय कर सकते हैं। उनके अभियान ने सोशल मीडिया पर परिणामों का जश्न मनाया, लेकिन बाद में उस पोस्ट को हटा दिया गया। चाहे ये आंकड़े वास्तविक हों या नहीं, पत्रकारों के सामने हमेशा से एक पेचीदा सवाल रहा है। इनमें कुछ ऐसा आकर्षण होता है जिसका विरोध करना मुश्किल है। ऐसे ठोस आंकड़े जो चुनाव के नतीजे आने से पहले ही उसका आकलन कर देते हैं? भला ऐसा कौन नहीं चाहेगा?

महज एक अनुमान है, भविष्यवाणियां नहीं

जनमत सर्वेक्षण महज एक अनुमान है, भविष्यवाणियां नहीं। इनकी उपयोगिता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि इन्हें किसने आयोजित किया, किन लोगों का सर्वेक्षण किया और कैसे किया। सर्वेक्षण में संदर्भ के बिना, सबसे विश्वसनीय जनमत सर्वेक्षण भी किसी चुनाव की भ्रामक तस्वीर पेश कर सकते हैं।