Pakistan Protest News: पाकिस्तान में ईंधन की लगातार बढ़ती आसमान छूती कीमतों और पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ जनता का गुस्सा फुट पड़ा है। देश भर में शुक्रवार से जारी विरोध-प्रदर्शनों और रैलियों के बीच अब ट्रांसपोर्टरों ने 12 अगस्त 2026 से पूरे देश में पूर्ण 'चक्का जाम' का ऐलान कर दिया है। राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रांतीय राजधानियों में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
ईंधन के दामों से बेहाल जनता, 500 से अधिक रैलियां
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 335 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। चालू वित्त वर्ष के बजट में सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर लगाई गई 70 से 80 रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड पेट्रोलियम लेवी ने आम जनता और व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है। ईंधन की कीमतों के खिलाफ महज दो दिनों में देश भर में 500 से ज्यादा रैलियां, विरोध-प्रदर्शन और स्थानीय चक्का जाम दर्ज किए गए हैं। इससे पहले अप्रैल के महीने में पेट्रोल रिकॉर्ड 459 रुपये प्रति लीटर और डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
12 अगस्त से थमेंगे ट्रकों और बसों के पहिए
'ऑल पाकिस्तान पब्लिक ट्रांसपोर्ट ओनर्स फेडरेशन' और 'गुड्स ट्रांसपोर्टर्स' ने संयुक्त रूप से 12 अगस्त की सुबह से पाकिस्तान में ट्रकों, बसों और अंतर-राज्यीय सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया है।
पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्टर्स अलायंस के चेयरमैन निसार हुसैन जाफरी के अनुसार, भारी पेट्रोलियम लेवी, ऊंचे टोल प्लाजा शुल्क और सरकार द्वारा लागू दैनिक ईंधन मूल्य प्रणाली के चलते परिवहन व्यवसाय चलाना अब असंभव हो गया है। पहले से जारी हड़ताल के कारण देश के लगभग 4 लाख मालवाहक वाहनों के पहिए थम चुके हैं, जिससे माल आपूर्ति ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।
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जमात-ए-इस्लामी का 16 अगस्त को प्रांतीय प्रदर्शन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी ने सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। संगठन ने 16 अगस्त (रविवार) को पाकिस्तान की चारों प्रांतीय राजधानियों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है।
सोमवार को ट्रांसपोर्ट यूनियनों और सरकार के बीच एक दौर की वार्ता प्रस्तावित है। यदि इस वार्ता में कोई ठोस हल नहीं निकलता, तो आने वाले दिनों में पाकिस्तान में आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा सकती है और महंगाई का संकट गहरा सकता है।
Written by Shailesh Yadav