Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। 13 अगस्त की शाम टनल में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा भरने से वहां काम कर रहे 22 श्रमिक फंस गए थे। हादसे में अब तक 8 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 श्रमिक अभी भी लापता हैं। रेस्क्यू टीमें टनल के अंदर लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

टनल में कैसे हुआ हादसा?
बताया जा रहा है कि 13 अगस्त की शाम करीब 7 बजे श्रमिक टनल के अंदर काम कर रहे थे। इसी दौरान गेट से करीब 1.5 से 1.8 किलोमीटर अंदर अचानक जोरदार धमाका हुआ और भारी मात्रा में पानी के साथ मलबा टनल में भरने लगा। टनल का हिस्सा नीचे की ओर होने के कारण पानी और गाद तेजी से अंदर जमा होती गई। देखते ही देखते श्रमिकों के लिए बाहर निकलने का रास्ता मुश्किल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।

22 में से 12 श्रमिक बाहर निकाले गए
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान शनिवार को श्रमिक देवनाथ को टनल से बाहर निकाला गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रशासन के मुताबिक कुल 22 श्रमिकों में से 12 को बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से 8 की मौत हो चुकी है, जबकि 2 श्रमिकों की तलाश अभी जारी है। टनल में जमा पानी और गाद को बाहर निकालने का काम भी लगातार किया जा रहा है। बचाव दल बड़ी मशीनों और अस्थायी नावों की मदद से अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्री का श्रमिकों ने किया घेराव
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक शनिवार को घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली और सभी उपलब्ध संसाधनों तथा मशीनरी के बेहतर समन्वय के साथ अभियान तेज करने के निर्देश दिए। इसी दौरान परियोजना में काम करने वाले श्रमिकों ने मंत्री का घेराव कर दिया। श्रमिकों ने मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और हादसे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। मंत्री के आश्वासन के बाद श्रमिक शांत हुए। बताया गया कि मंत्री ने परियोजना का काम कर रही टीएचडीसी को मुआवजा देने और जांच पूरी होने तक परियोजना का काम बंद रखने के निर्देश दिए हैं।

श्रमिकों ने लगाया लापरवाही का आरोप
हादसे के बाद कुछ श्रमिकों ने आरोप लगाया कि टनल में पहले से पानी का रिसाव हो रहा था। उनका दावा है कि इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन कथित तौर पर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे की वास्तविक वजह और किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसका पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने लिया जायजा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटनास्थल का दौरा कर बचाव अभियान की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों का हालचाल जाना और अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए। फिलहाल रेस्क्यू टीमों का पूरा ध्यान टनल में लापता दोनों श्रमिकों को खोजने और अंदर जमा पानी-मलबे को हटाने पर है। सरकार का कहना है कि हर श्रमिक की जान महत्वपूर्ण है और बचाव अभियान को पूरी क्षमता के साथ जारी रखा जाएगा। 

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Written by Shailesh Yadav