Balochistan Independence Day 2026: 11 अगस्त को बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बलूच आंदोलन ने एक नया और बड़ा मोड़ ले लिया है। बलूच नेता मीर यार बलूच ने 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' को एक स्वतंत्र देश घोषित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे आधिकारिक मान्यता देने की मांग की है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संबोधन में उन्होंने पाकिस्तान की तुलना 'कैंसर' से की और बलूच सरजमीं से इस व्यवस्था को पूरी तरह उखाड़ फेंकने का संकल्प जताया।
भारत को भेजा स्पेशल मैसेज, मीडिया का जताया आभार
बलूच नेतृत्व ने अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश में भारतीय मीडिया, पत्रकारों और विश्लेषकों का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया ने बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों, जबरन गुमशुदगी और बलूच जनता के दशकों पुराने संघर्ष को वैश्विक मंच पर उठाने में साहसिक भूमिका निभाई है।
स्वतंत्र देश के रूप में काम करने की तैयारी
आजादी के ऐलान के साथ ही बलूच नेताओं ने दुनिया भर के देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान का 'प्रांत' कहना तुरंत बंद किया जाए। 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने स्पष्ट किया कि वह अब अपनी विदेश नीति, रक्षा, आर्थिक मामलों और कूटनीति की जिम्मेदारी स्वयं संभालेगा। बलूचिस्तान अपना पासपोर्ट, राष्ट्रीय मुद्रा, आधिकारिक मीडिया संस्थान, व्यापारिक संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मिशन स्थापित करने की तैयारियों में जुटा है। संयुक्त राष्ट्र (UN), आसियान (ASEAN), अफ्रीकी संघ (AU), OIC और यूरोपीय देशों से संप्रभुता स्वीकार करने का आग्रह किया गया है। विभिन्न बलूच राजनीतिक धड़ों को एक साझा मंच पर लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
11 अगस्त का ऐतिहासिक संदर्भ
बलूच अलगाववादी आंदोलन का 11 अगस्त से गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव है। मीर यार बलूच के अनुसार, 11 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के जाने के बाद बलूचिस्तान ने खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया था। हालांकि, मार्च 1948 में पाकिस्तानी सेना ने सैन्य बल का प्रयोग कर जबरन इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। बलूच जनता पिछले 77 सालों से इस अवैध कब्जे के खिलाफ संघर्ष कर रही है।
किलेबंदी और इंटरनेट ब्लैकआउट
बलूचिस्तान में स्वतंत्रता दिवस के सम्मेलनों और रैलियों को रोकने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। क्वेटा, कलात और खुजदार जैसे प्रमुख शहरों में सैन्य छावनियों और पुलिस स्टेशनों के चारों ओर खाइयां खोदी गई हैं। पूरे क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट और दूरसंचार सेवाएं बंद कर दी गई हैं। आसमान में पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमान, ड्रोन और हेलीकॉप्टर लगातार गश्त कर रहे हैं। इन तमाम पाबंदियों के बावजूद, बलूचिस्तान के कई हिस्सों से आम नागरिकों द्वारा झंडे फहराने और आजादी का जश्न मनाने की खबरें आई हैं।
संसाधनों से समृद्ध, फिर भी जुल्म का शिकार
क्षेत्रफल के आधार पर बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो प्राकृतिक गैस, सोने, तांबे और अन्य बहुमूल्य खनिजों से भरा हुआ है। इसके बावजूद, यह इलाका अत्यंत गरीब और पिछड़ा हुआ है। पाकिस्तानी सेना पर लंबे समय से बलूच युवाओं के अपहरण, फर्जी मुठभेड़ों और मानवाधिकार हनन के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। हाल के दिनों में बलूच विद्रोहियों द्वारा पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजनाओं को पहुंचाए गए नुकसान ने इस्लामाबाद की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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Written by Shailesh Yadav