टीएनपी न्यूज़
ब्रेकिंग
बिहार में मखाना विकास योजना के लिए 89 करोड़ रुपये की मंजूरी, सम्राट कैबिनेट का फैसला अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के बीच हुआ किशाऊ परियोजना समझौता राजस्थान सरकार ने आगरा की जयपुर हाउस कॉलोनी समेत कई संपत्तियों पर मांगा मालिकाना हक जंतर-मतर प्रोटेस्ट: मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत पीएम मोदी ने प्रख्यात बंगाली लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय को 150वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि बीजेपी के UCC का मतलब है Underground Communal Conspiracy: अखिलेश दिल्ली में सितंबर में दर्ज हुए डेंगू और मलेरिया के सबसे ज्यादा मामले: MCD 16 सितंबर को चीन जाएंगे ईरानी विदेश मंत्री अराघची, वांग यी से होगी वार्ता दिल्ली में छात्रों के लिए 10 हजार बेड वाला हॉस्टल, CM रेखा गुप्ता का ऐलान जंतर-मतर प्रोटेस्ट: मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत
टेक

Google Earth का AI इमेज फीचर लॉन्च के कुछ घंटों बाद ही क्यों हुआ बंद? जानिए पूरी वजह

लॉन्च के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि Google ने इस फीचर को वापस लेने का फैसला कर लिया। कंपनी का कहना था कि यह फीचर लोगों की कल्पना को नई उड़ान देगा।

Google Earth का AI इमेज फीचर लॉन्च के कुछ घंटों बाद ही क्यों हुआ बंद? जानिए पूरी वजह
Google AI tool

Google ने हाल ही में Google Earth के लिए एक नया AI आधारित फीचर पेश किया था, जो यूजर्स को सैटेलाइट और मैप डेटा की मदद से नई तस्वीरें बनाने की सुविधा देता था। कंपनी के अनुसार, इस टूल का उद्देश्य लोगों को अपनी कल्पना के आधार पर विजुअल तैयार करने का मौका देना था। लेकिन लॉन्च के एक दिन के अंदर ही Google ने इस फीचर को अस्थायी रूप से हटाने का फैसला कर लिया। इस फैसले की वजह सुरक्षा और गलत जानकारी फैलने की चिंता बताई गई। कई रिसर्चर्स और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल नकली सैटेलाइट इमेज बनाने के लिए किया जा सकता है, जो असली जैसी दिख सकती हैं और लोगों को भ्रमित कर सकती हैं।

क्या था Google Earth का Create Image फीचर?

Google ने 30 जुलाई को Google Earth में Create Image नाम से यह नया AI टूल जोड़ा था। यह फीचर कंपनी की Nano Banana 2 इमेज जनरेशन तकनीक पर आधारित था।
इसकी मदद से यूजर Google Earth पर किसी भी लोकेशन को चुनकर AI से नई तस्वीर बनवा सकते थे। यूजर को सिर्फ यह बताना होता था कि उन्हें किस तरह की इमेज चाहिए। इसके बाद AI उस जगह की सैटेलाइट तस्वीरों, एरियल व्यू और 3D मैपिंग डेटा को आधार बनाकर कुछ सेकंड में एक नई इमेज तैयार कर देता था। Google का उद्देश्य इस फीचर के जरिए एजुकेशन, क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स और जियोस्पेशियल कामों में लोगों की मदद करना था।

24 घंटे के अंदर क्यों हटाना पड़ा फीचर?

फीचर उपलब्ध होने के बाद ही विशेषज्ञों ने इसकी संभावित कमियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उनका कहना था कि AI की मदद से बनाई गई ऐसी तस्वीरें इतनी वास्तविक लग सकती हैं कि आम यूजर के लिए असली और नकली सैटेलाइट फोटो में अंतर करना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों को डर था कि इस तकनीक का इस्तेमाल युद्ध, राजनीति, आपदा या संवेदनशील स्थानों से जुड़ी झूठी जानकारी फैलाने के लिए किया जा सकता है। इन चिंताओं को देखते हुए Google ने फैसला किया कि जब तक बेहतर सुरक्षा उपाय लागू नहीं हो जाते, तब तक इस फीचर को रोक दिया जाए।

AI से बनी तस्वीर की पहचान कैसे होगी?

Google के मुताबिक, Create Image फीचर से तैयार की गई तस्वीरों में SynthID डिजिटल वॉटरमार्क शामिल किया जाता है। यह एक तकनीकी पहचान चिन्ह होता है, जिससे पता लगाया जा सकता है कि तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है। अगर किसी फोटो की वास्तविकता पर संदेह हो, तो यूजर Gemini ऐप या Google Lens जैसे टूल की मदद से जांच कर सकता है कि उसमें SynthID मौजूद है या नहीं। Google का कहना है कि वह AI तकनीक के गलत इस्तेमाल को गंभीरता से लेता है और भविष्य में ऐसे फीचर्स के लिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा प्रणाली विकसित करेगा।

Google ने फीचर हटाने पर क्या कहा?

Google ने बताया कि लोग Google Earth का इस्तेमाल दुनिया की भरोसेमंद और वास्तविक जानकारी देखने के लिए करते हैं। कंपनी ने कहा कि कई जियोस्पेशियल विशेषज्ञ इस फीचर का इस्तेमाल सकारात्मक उद्देश्यों के लिए कर रहे थे, लेकिन कुछ ऐसे उदाहरण भी सामने आए जहां इसका इस्तेमाल कंपनी की नीतियों के खिलाफ होता दिखा। इसी कारण Google ने Create Image फीचर को फिलहाल बंद करने का निर्णय लिया। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि AI से बनाई गई तस्वीरें Google Earth के मुख्य प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थीं और उनमें AI-generated होने का संकेत मौजूद था।

ये भी पढ़ें-बार-बार बल्ब फ्यूज होने से हैं परेशान? जानिए इसके पीछे की वजह और इसके उपाय

विशेषज्ञों ने किन खतरों की ओर इशारा किया?

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस रिसर्चर हेन्क वैन एस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उन्होंने इस फीचर के जरिए कई संवेदनशील विषयों से जुड़ी तस्वीरें बनाने की कोशिश की, जिनमें मैक्सिको सीमा, ईरान के परमाणु ठिकाने, एम्स्टर्डम विमान दुर्घटना और गाजा के अस्पताल जैसे विषय शामिल थे। उनके अनुसार, कई अनुरोधों को सिस्टम ने रोकने में सफलता नहीं दिखाई। वहीं, सैटेलाइट इमेज एनालिसिस से जुड़े रिसर्चर ब्रैडी अफ्रिक ने चिंता जताई कि यह तकनीक नकली सैटेलाइट तस्वीरें बनाना आसान कर सकती है। ऐसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल सकती हैं और लोगों को गलत जानकारी पर विश्वास करने के लिए मजबूर कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से असली सैटेलाइट डेटा पर भरोसा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। रिसर्चर्स के लिए किसी भी तस्वीर की सत्यता जांचना पहले से ज्यादा कठिन हो सकता है।

 

 

  Written By Toshi Shah  

 

Rajeev Singh

आपके दिए हुए प्रोफाइल को **राजीव सिंह** और **TNP News** के अनुसार ढालकर, NBT/Times of India से जुड़े संदर्भ हटाकर इस तरह किया जा सकता है: ## राजीव सिंह, TNP News में एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। राजीव सिंह TNP News में एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज और रिसर्च आधारित खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और एंटरटेनमेंट समेत विभिन्न कैटेगरी की खबरों से जुड़े होते हैं। किसी भी विषय पर स्टोरी तैयार करते समय शरद दीक्षित रिसर्च, डीप डाइव, फैक्ट चेक, वैल्यू एड और विशेषज्ञों की राय को विशेष महत्व देते हैं। TNP News के लिए वे महत्वपूर्ण और चर्चित मुद्दों पर विश्लेषणात्मक एवं रियल टाइम स्टोरीज तैयार करते हैं। उनका फोकस किसी भी खबर को केवल प्रस्तुत करने के बजाय उसके पीछे की पूरी कहानी, तथ्यों और उसके संभावित प्रभाव को पाठकों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर रहता है। राजीव सिंह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन की खबरों पर लगातार नजर रखने का अनुभव है। किसी भी खबर पर उनकी पहली प्राथमिकता तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी होती है। इसके बाद वे यह समझने पर जोर देते हैं कि उस खबर का समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ### पत्रकारिता का अनुभव राजीव सिंह ने पत्रकारिता के क्षेत्र में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू, रिसर्च, डिजिटल कंटेंट और स्पेशल स्टोरीज जैसी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने समाचारों के पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ डिजिटल पत्रकारिता की बदलती जरूरतों और नई तकनीकों को भी करीब से समझा है। उन्होंने राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों को कवर करने के साथ-साथ राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव, सामाजिक विषयों, प्रशासनिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। TNP News में राजीव सिंह का प्रमुख फोकस रिसर्च आधारित पत्रकारिता, एक्सप्लेनर स्टोरी, डीप डाइव, स्पेशल स्टोरी और तथ्यपरक विश्लेषण पर है। उनका प्रयास रहता है कि जटिल और महत्वपूर्ण विषयों को आसान भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि पाठक खबर के साथ-साथ उसके कारण, प्रभाव और पूरे संदर्भ को भी समझ सके। ### पत्रकारिता का दृष्टिकोण राजीव सिंह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड पर उनकी लगातार नजर रहती है। वे खबर के तत्काल प्रभाव के साथ-साथ उसके दीर्घकालिक प्रभाव को भी समझने और पाठकों के सामने रखने पर जोर देते हैं। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि पाठकों को **खबर के पीछे की कहानी, तथ्य और उसका असर** समझाना है। ### TNP News में भूमिका TNP News में राजीव सिंह एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज, डीप डाइव और रिसर्च आधारित कंटेंट के साथ काम कर रहे हैं। वे महत्वपूर्ण घटनाओं और ट्रेंडिंग मुद्दों पर रियल टाइम एक्सप्लेनर और विश्लेषणात्मक स्टोरी तैयार करने के साथ डिजिटल ऑडियंस की जरूरतों के अनुसार कंटेंट को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर ध्यान देते हैं। TNP News के माध्यम से उनका प्रयास ऐसी पत्रकारिता को आगे बढ़ाना है जिसमें **तथ्य, रिसर्च, निष्पक्ष विश्लेषण और जनसरोकार** को प्राथमिकता मिले।

शॉर्ट वीडियो

सभी वीडियो