शिमला: हिमाचल प्रदेश में भाजपा के प्रदेश प्रभारी और मथुरा से विधायक (MLA) श्रीकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर जनजातीय क्षेत्रों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। शर्मा ने कहा कि सर्दियों और बर्फबारी का मौसम नजदीक है, लेकिन दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण सड़कों की बिगड़ती हालत दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के लोगों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
शर्मा ने आदिवासी इलाकों को नज़रअंदाज़ करने का लगाया आरोप
इस संदर्भ में मथुरा के MLA श्रीकांत शर्मा ने आदिवासी इलाकों को नज़रअंदाज़ करने के आरोप में कांग्रेस सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार लाहौल-स्पीति के लोगों से वोट लेने में दिलचस्पी रखती है, लेकिन ज़रूरी पब्लिक सर्विस देने में नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि जलमा पंचायत और आसपास के गांवों के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य बीमारियों की दवाइयां तक उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें मिली हैं।
इमरजेंसी मेडिकल सर्विस सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी
श्रीकांत शर्मा ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर प्राइमरी हेल्थ सेंटर आम बीमारियों के लिए दवाएँ नहीं दे सकते, तो सरकार कड़ाके की सर्दी के महीनों में गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों का इलाज कैसे पक्का करेगी?" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आदिवासी इलाकों के कई गाँवों को सर्दियों के दौरान कनेक्टिविटी की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, ज़रूरी दवाओं का काफ़ी स्टॉक, हेल्थकेयर की सुविधाएँ और इमरजेंसी मेडिकल सर्विस सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
आवंटित धनराशि का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की
शर्मा ने मियार घाटी और चोखांग की ग्रामीण सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा कि बर्फबारी से पहले सड़कों की मरम्मत के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत की गई है और कितना काम पूरा हुआ है। उन्होंने जनजातीय विकास के लिए आवंटित जारी राशि और खर्च की गई धनराशि का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की।
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