उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर बनाने की दिशा में ग्रीनफील्ड सिक्सलेन एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर चर्चा तेज है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से वाराणसी से कोलकाता तक का सफर पहले के मुकाबले आसान और तेज होने की उम्मीद है। दावा किया जा रहा है कि यात्रा का समय घटकर करीब 6 घंटे रह सकता है। हालांकि, वास्तविक समय एक्सप्रेसवे के पूरे होने, निर्धारित गति सीमा और यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा।
किन राज्यों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे?
वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उद्देश्य पूर्वी भारत के प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच तेज संपर्क स्थापित करना है। प्रस्तावित मार्ग उत्तर प्रदेश से शुरू होकर बिहार और झारखंड के रास्ते पश्चिम बंगाल तक पहुंचने की योजना से जुड़ा है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों और माल परिवहन को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सफर में कितना समय बचेगा?
एक्सप्रेसवे पर छह लेन की सड़क होने से वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकती है। इससे ट्रैफिक जाम और शहरों के बीच से गुजरने की परेशानी कम होने की संभावना है। वाराणसी से कोलकाता की यात्रा में करीब छह घंटे लगने का अनुमान बताया जा रहा है, लेकिन इसे अंतिम या सुनिश्चित यात्रा समय नहीं माना जाना चाहिए।
कारोबार और परिवहन को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से संबंधित क्षेत्रों में व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को फायदा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से मालवाहक वाहनों की आवाजाही आसान हो सकती है। साथ ही, रास्ते में पड़ने वाले क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यात्रियों को लंबी दूरी तय करने के लिए बेहतर सड़क विकल्प मिल सकता है। हालांकि, परियोजना की मौजूदा निर्माण स्थिति, पूरा रूट, अलग-अलग हिस्सों की समयसीमा और छह घंटे के यात्रा दावे की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
यह भी पढ़ें: यमुना में फिर जहरीला झाग, दिल्ली-NCR की हवा भी जहरीली! आखिर प्रदूषण पर कब जागेगी सरकार?