America News: भारत के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर्स हिमांशु भाऊ लंबी तलाश के बाद आखिरकार 4 साल बाद US में पकड़ा गया है। दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में पुलिस के लिए सिर का दर्द बन चुका भाऊ भारत के सबसे बदनाम भगोड़ों में से एक है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग का शातिर गैंगस्टर भाऊ को इंटरपोल से रेड कार्ड जारी हो चुका था। इस पूरी कार्रवाई में भारत द्वारा यूएस की मदद की गई।
क्योंकि भारत की सेंट्रल एजेंसियों ने लास वेगास में भाऊ की मौजुदगी की जानकारी दी थी। इसके साथ ही एक अन्य भगोड़ा गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया को भी हिरासत में ले लिया गया है। नीरज फरीदपुरिया इसी वर्ष हिरासत में लिए जाने और बेल पर रिहा होने के बाद अपने एंकल ब्रेसलेट ट्रैकर को हटाने और गिरफ्तारी से खुद को बचाने के लिए पुलिस के साथ चूहे बिल्ली का खेल खेल रहा था।
FBI को मिली भारत से मदद
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के सोर्स द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक हिमांशु के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी किया गया था और दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस की कई टीमें US में उसकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए काम कर रही थीं। गैंगस्टर भाऊ दिल्ली और हरियाणा में फायरिंग, हत्या और करोड़ों की रंगदारी समेत कई अपराधिक मामलों में वॉन्टेड क्रिमिनल हैं।
भारतीय एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद FBI ने भाऊ को लास वेगास/नेवादा से धर दबोचा। हालांकि आने वाले दिनों में उसे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंपने की बात भी सामने आई है, लेकिन अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टी नहीं की गई है।
20 साल की उम्र में बना भगोड़ा
साल 2022 से दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की पुलिस लगातार उसका पीछा कर रही हैं। भाऊ तकरीबन 20 साल की उम्र से उत्तर भारत का सबसे बड़ा भगोड़ा बन चुका है। जिसका एक ऑर्गनाइज़्ड क्राइम सिंडिकेट चलता है। भाऊ पर कई हत्याओं के मामले दर्ज है। इसमें दिल्ली में हुई 3 सनसनीखेज हत्याएं भी उसके खाते में शामिल हैं। भाऊ हरियाणा में रोहतक जिले के रिटोली का रहने वाला है। स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही वह क्राइम की दुनिया में कदम रख चुका था।
कब रडार पर आया
भाऊ साल 2020 में पुलिस रिकॉर्ड में पहली बार उस समय आया, जब उसके गांव में विवाद के दौरान उसने हत्या की कोशिश की थी। क्योंकि पकड़े जाने के समय वह नाबालिग था, इसलिए पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर हिसार के जुवेनाइल ऑब्ज़र्वेशन होम भेजा। हालांकि भाऊ ज्यादा दिन नहीं रहा। उसने रिहैबिलिटेशन से फरार होकर क्राइम का रास्ता चुना। जल्द ही हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में अपना खौफ फैलाया।
2 गैंग से जुड़ा
नीरज बवाना और नवीन बाली गैंग जैसे पुराने गैंग के साथ मिलकर काम करते हुए, भाऊ ने रोहतक, झुंझुनू, सोनीपत और दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन में एक मज़बूत नेटवर्क बना लिया। कानून लागू करने वाली एजेंसियां उसके लोकल ठिकानों पर पहुंचीं और अपनी रडार पर लिया। मार्च 2022 में उसके होम डिस्ट्रिक्ट में कई हाई-प्रोफाइल मर्डर भी शामिल थे, वह देश से भागने की प्लानिंग करने में कामयाब हो गया।
साल 2022 में उसने मार्च महीने में 24 दिनों में 3 हत्याएं कीं। उसी वर्ष नकली डॉक्यूमेंट्स से मिले पासपोर्ट का इस्तेमाल करके भाऊ इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर दुबई भागा और फिर पुर्तगाल जैसे यूरोपियन सुरक्षित ठिकानों पर चला गया, जहां बैठकर वह अपने सिंडिकेट को चलाता रहा।
नीरज फरीदपुरिया का भी रहा है लंबा अपराधिक इतिहास
हिमांशु भाऊ के साथ अमेरिका में धर दबोचे गए नीरज फरीदपुरिया का भी आपराधिक इतिहास काफी लंबा रहा है। नीरज के खिलाफ रंगदारी, मारपीट, अवैध वसूली और संगठित आपराधिक गतिविधियों के में नीरज फरीदपुरिया पर कई केस दर्ज हैं। NIA हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया, दोनों के घरों पर पुलिस ने कई बार छापेमारी की है। साल 2012 में नीरज फरीदपुरिया को हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया था।
जिसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था। साल 2015 में उसे हत्या मामले में उम्रकैद की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, साल 2019 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से उसे रिहाई मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद नीरज विदेश भाग गया था। जहां रहकर वह लगातार पुलिस को चुनौती दे रहा था।
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