नई दिल्ली: दिवाली पर पटाखे जलाना बहुत से लोगों के लिए जश्न का हिस्सा है, लेकिन इनसे होने वाले हादसे कई परिवारों के लिए त्योहार को दुख में बदल देते हैं। पटाखों से जलने, आंखों में चोट लगने और आग फैलने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। कई बार पटाखों के निर्माण या भंडारण के दौरान विस्फोट भी हो जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि देश में पटाखों से हर साल कितने लोग जान गंवाते हैं और कितने घायल होते हैं?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों में पटाखों से जुड़ी दुर्घटनाओं को ‘Accidental Fire (Fireworks)’ यानी पटाखों से हुई आकस्मिक आग की श्रेणी में दर्ज किया जाता है। हालांकि, यह आंकड़ा सिर्फ दिवाली की रात का नहीं है। इसमें सालभर में दर्ज ऐसी घटनाएं शामिल हो सकती हैं। 

2021 से 2024 तक क्या बताते हैं सरकारी आंकड़े?

NCRB की Accidental Deaths and Suicides in India रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में पटाखों से जुड़े 129 हादसे दर्ज हुए। इन घटनाओं में 79 लोग घायल हुए और 148 लोगों की मौत दर्ज की गई। वर्ष 2022 में 90 हादसे सामने आए, जिनमें 36 लोग घायल हुए और 111 लोगों की जान गई। 2024 की रिपोर्ट में पटाखों से जुड़ी 110 दुर्घटनाएं दर्ज हैं। इनमें 112 लोग घायल हुए, जबकि 134 लोगों की मौत दर्ज की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि पटाखों से जुड़े हादसे सिर्फ मामूली जलने तक सीमित नहीं रहते। कुछ घटनाओं में जानलेवा चोटें भी सामने आती हैं।

दिवाली के दौरान अस्पतालों में बढ़ जाते हैं जलने के मामले

दिवाली के आसपास अस्पतालों में पटाखों से जलने और आंखों में चोट लगने वाले मरीज भी पहुंचते हैं। दिल्ली में वर्ष 2025 की दिवाली और उससे एक दिन पहले पांच बड़े अस्पतालों में जलने के 325 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें लगभग 270 मामले पटाखों से जुड़े थे। यह आंकड़ा केवल इन अस्पतालों का है, पूरे देश का नहीं। आंखों की चोटों को लेकर 2023 और 2024 के दिवाली सीजन में मध्य और पश्चिम भारत के तीन बड़े नेत्र चिकित्सा केंद्रों पर किए गए एक अध्ययन में पटाखों से आंखों में चोट के 67 मरीज शामिल थे। इनमें 62.7 प्रतिशत बच्चे थे और करीब 90 प्रतिशत मरीज पुरुष थे। अध्ययन में 23.9 प्रतिशत मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ी।

बच्चों और आंखों को सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत

पटाखों से निकलने वाली चिंगारी त्वचा और कपड़ों को जला सकती है। तेज धमाके या पटाखे के अचानक फटने से चेहरे और आंखों पर गंभीर चोट लग सकती है। आंखों की चोट के कुछ मामलों में नजर पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के लिए चिंता की एक वजह यह भी है कि कई लोग बुझ चुके पटाखे को दोबारा जलाने की कोशिश करते हैं या उसे उठाकर देखते हैं। ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

पटाखों के हादसे सिर्फ दिवाली तक सीमित नहीं

पटाखों से जुड़े हादसे घरों और सड़कों पर इस्तेमाल के दौरान ही नहीं, बल्कि इनके निर्माण और भंडारण के समय भी होते हैं। तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में पटाखा फैक्ट्रियों में हुए हादसों पर अगस्त 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से अगस्त 2025 के बीच 134 लोगों की मौत हुई और 89 लोग घायल हुए। ये आंकड़े फैक्ट्री दुर्घटनाओं के हैं, दिवाली पर पटाखे जलाने से हुए हादसों के नहीं। 

पटाखे जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • पटाखे खुले स्थान पर और सुरक्षित दूरी बनाकर जलाएं।
  • बच्चों को पटाखों के साथ अकेला न छोड़ें।
  • पटाखा न जलने पर उसके पास जाकर तुरंत दोबारा आग न लगाएं।
  • आंखों और चेहरे को चिंगारी से बचाने के लिए विशेष सावधानी रखें।
  • जलने या आंख में चोट लगने पर घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय चिकित्सा सहायता लें।