नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सैनिकों और चीनी सैनिकों के बीच झड़प जारी रहने के दावे को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि चीन से जुड़ी सीमा संबंधी खबरों को लगातार दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने भारत-चीन संबंधों, सीमा पर पेट्रोलिंग और चीन पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के कथित बयान का हवाला देते हुए अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ झड़प का मुद्दा उठाया है। खेड़ा ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे ITBP समेत सभी सुरक्षाकर्मियों का सम्मान किया जाना चाहिए।
"चीन बहुत आगे निकल गया है। चीन का मुकाबला परंपरागत तरीकों से करना कठिन है।" - ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने सिस्टेमैटिक तरीके से हमारी सेनाओं को कमजोर किया। इन्वेस्ट नहीं किया गया, मॉर्डनाइजेशन पर ध्यान नहीं दिया गया। सेना को कमजोर करने को अग्निवीर जैसी फर्जी स्कीम लाए। साथ ही जब सेनाओं को प्रधानमंत्री और सरकार से हौसलाअफजाई की दरकार थी, तब मोदी चीन को क्लीनचिट देते रहे, चीन के राष्ट्रपति का स्वागत करते रहे। मोदी ने देश और सेना को बहुत पीछे धकेल दिया है।
— Congress (@INCIndia) October 23, 2026
चीन के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के साथ सीमा विवाद पर सख्त रुख अपनाने के बजाय कई मौकों पर नरम रवैया दिखाया है। उन्होंने BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात का जिक्र करते हुए सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता ने साल 2020 के गलवान संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भारतीय सैनिकों की शहादत के बावजूद चीन को लेकर सरकार के बयानों ने कई सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सीमा पर भारतीय सेना की पेट्रोलिंग से जुड़े मुद्दों को भी उठाया और पूछा कि क्या भारत उन सभी पेट्रोलिंग पॉइंट पर पहले की तरह पहुंच पा रहा है, जहां अप्रैल 2020 से पहले गश्त की जाती थी।
पेट्रोलिंग पॉइंट और सीमा विवाद पर मांगा जवाब
पवन खेड़ा ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या साल 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल हुई है और यदि नहीं, तो इसे बहाल करने की समयसीमा क्या है।
उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के शेरा-5, असाफिला, माजा और तस्किन जैसे इलाकों में पेट्रोलिंग को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की चुप्पी चीन के हौसले बढ़ा रही है। हालांकि, इन विशिष्ट स्थानों पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी और पेट्रोलिंग की मौजूदा स्थिति से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चीन पर आर्थिक निर्भरता को लेकर भी सवाल
कांग्रेस ने सीमा विवाद के साथ-साथ भारत के चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर भी सवाल उठाए। पवन खेड़ा ने भारत के व्यापार घाटे, चीनी निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता का मुद्दा उठाया।
उन्होंने दावा किया कि चीन से व्यापार घाटा बढ़कर 99 अरब डॉलर से 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। साथ ही, उन्होंने टनल बोरिंग मशीनों, रेयर अर्थ मटेरियल, उर्वरकों और दवाइयों के लिए आवश्यक एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) की आपूर्ति में चीन की भूमिका का जिक्र किया।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता भारत की रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है। उन्होंने प्रेस नोट-3 में बदलाव, चीनी निवेश संबंधी नियमों और वीजा प्रतिबंधों में ढील को लेकर भी केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
'न्यू स्टेटस क्वो' को लेकर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस नेता ने भारत-चीन सीमा वार्ता में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले जैसी स्थिति बहाल करने यानी 'Status Quo Ante' की मांग को पीछे छोड़ दिया है और अब 'New Status Quo' की दिशा में आगे बढ़ रही है।
हमारा सवाल है कि 👇 ⦿ क्या अरुणाचल प्रदेश में शेरा-5 प्वांट तक हम पेट्रोलिंग कर पा रहे हैं या नहीं? ⦿ क्या असाफिला, माजा और तस्किन में चीन ने 7 किलोमीटर अंदर आकर अपने टेंट गाड़ रखे हैं? ⦿ क्या पूर्वी लद्दाख में साल 2020 से पहले वाली यथास्थिति बहाल हुई है? अगर नहीं हुई, तो कब होगी? ⦿ चीन के साथ बार-बार मुलाकातें होती हैं, लेकिन भारत को उन मुलाकातों से आखिर क्या मिला? ⦿ चीन से लगातार मुकाबला करना पड़ रहा है, फिर भी सरकार ने चीन पर आर्थिक निर्भरता क्यों बढ़ा दी? ⦿ भारत सरकार ने चीनी निवेश और PLA से जुड़ी कंपनियों के लिए रास्ते आसान क्यों बनाए? : AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन @Pawankhera जी 📍 दिल्ली
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खेड़ा ने कहा कि सीमा विवाद का समाधान किए बिना किसी नई स्थिति को स्वीकार करना भारत के हितों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने गलवान, डोकलाम और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए।
मोदी सरकार से कांग्रेस के प्रमुख सवाल
पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार से कई सवालों के जवाब मांगे। इनमें प्रमुख हैं:
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क्या अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी लद्दाख के सभी संबंधित पेट्रोलिंग पॉइंट पर भारतीय सैनिक पहले की तरह गश्त कर पा रहे हैं?
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क्या पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल हुई है?
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चीन के साथ उच्चस्तरीय बैठकों के बावजूद सीमा विवाद का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
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चीन पर भारत की आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
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चीनी निवेश और चीन से जुड़ी कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव क्यों किए गए?
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सीमा सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर सरकार की आगे की रणनीति क्या है?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चीन के साथ सीमा विवाद और आर्थिक संबंधों के मामले में केंद्र सरकार की नीतियों में स्पष्टता की कमी है। पार्टी ने मांग की कि सरकार सीमा पर मौजूदा स्थिति, पेट्रोलिंग व्यवस्था और चीन के साथ बातचीत के परिणामों पर देश के सामने तथ्य रखे।
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