Bedwetting In Children: बच्चों का रात में बिस्तर गीला करना यानी बेडवेटिंग माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन सकता है। खासकर जब बच्चा 7 साल या उससे ज्यादा उम्र का हो। कई माता-पिता इसे बच्चे की लापरवाही या अनुशासन की कमी समझते हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में बच्चा ऐसा जानबूझकर नहीं करता। इसके पीछे कई शारीरिक और कभी-कभी भावनात्मक कारण हो सकते हैं।

बेडवेटिंग के पीछे क्या हैं कारण?

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, बच्चों में बेडवेटिंग की समस्या को समझना जरूरी है। कुछ बच्चों का ब्लैडर रातभर पेशाब रोकने के लिए पूरी तरह विकसित नहीं होता। वहीं, कुछ के शरीर में रात के समय ज्यादा पेशाब बनता है या गहरी नींद के कारण वे ब्लैडर भरने का संकेत नहीं पहचान पाते। कब्ज, यूरिनरी इंफेक्शन, डायबिटीज और नींद में सांस लेने की परेशानी भी इसकी वजह हो सकती हैं। परिवार में किसी को बचपन में यह समस्या रही हो, तो बच्चे में भी इसकी आशंका बढ़ सकती है। 

घर पर अपनाएं ये आसान उपाय

1. बच्चे को दिन में नियमित रूप से टॉयलेट जाने की आदत डालें।

2. सोने से पहले पेशाब जरूर करवाएं।

3. दिन में पर्याप्त पानी दें, लेकिन शाम को बहुत ज्यादा तरल पदार्थ देने से बचें।

4. कोला, चाय और कैफीन वाले पेय न दें।

5. कब्ज की समस्या हो तो उसका इलाज करवाएं। 

6. रात में डिस्पोजेबल अब्जॉर्बेंट पैंट्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इन्हें समय पर बदलना जरूरी है, ताकि त्वचा में जलन न हो।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

अगर बच्चा 6 महीने तक रात में बिस्तर गीला नहीं करता था और फिर अचानक समस्या शुरू हो गई, तो डॉक्टर से सलाह लें। पेशाब में दर्द, बहुत ज्यादा प्यास, दिन में बार-बार पेशाब निकलना, कब्ज या तेज खर्राटे आने पर भी जांच जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार बेडवेटिंग अलार्म या दवा की सलाह दे सकते हैं।

बच्चे को डांटें नहीं, समझें

स्कूल का तनाव, बुलिंग या घर में बदलाव भी समस्या को दोबारा शुरू कर सकते हैं। बच्चे को शर्मिंदा करने, धमकाने या दूसरों से तुलना करने से बचें। सूखी रात के बजाय उसकी अच्छी आदतों और कोशिशों की तारीफ करें। माता-पिता का धैर्य और सहयोग बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।


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