
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सख्त कदमों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें “सीमित सैन्य कार्रवाई” भी शामिल है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के नेता अली खामेनेई और उनके परिवार को निशाना बनाने पर भी चर्चा हुई। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन ये खबरें अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा रही हैं।
“सीमित सैन्य कार्रवाई” पर बहस
अमेरिका में बहस चल रही है कि ईरान की गतिविधियों और उसके परमाणु कार्यक्रम पर किस तरह से कड़ा कदम उठाया जाए। “सीमित सैन्य हमला” का मतलब है कि बड़े युद्ध की बजाय सिर्फ कुछ खास सैन्य ठिकानों या अहम जगहों को निशाना बनाया जाए। समर्थक कहते हैं कि इससे ईरान को कड़ा संदेश जाएगा, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इससे पूरे पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ सकते हैं और ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई का खतरा भी बढ़ सकता है।
तेहरान की सख्त चेतावनी
ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया के संकेत मिल रहे हैं। तेहरान पहले ही साफ कर चुका है कि किसी भी हमले का जवाब “कठोर और निर्णायक” होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, इजराइल और खाड़ी देशों की भूमिका भी अहम हो सकती है, क्योंकि वे लंबे समय से ईरान की नीतियों को लेकर चिंतित रहे हैं।
क्या रणनीतिक दबाव है या टकराव?
ऐसे नाजुक मामले में अक्सर लोग बड़ी बातें करके या खबरें लीक करके रणनीति बनाते हैं। कई बार कड़ा रुख दिखाने का मकसद यही होता है कि बातचीत में अपनी पकड़ मजबूत हो। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर लगी हैं। आने वाले दिनों में ही साफ होगा कि यह सिर्फ चेतावनी है या फिर सच में किसी नए टकराव की शुरुआत हो रही है।
Written by : Anushka sagar

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