
अमेरिका और ईरान के बीच इस समय पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील बातचीत चल रही है। पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं क्योंकि पिछले सात हफ्तों से जारी युद्ध ने हजारों जानें ले ली हैं और ग्लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया है। लेकिन, इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ चल रही इस चर्चा के नतीजे चाहे जो भी हों, अमेरिका को इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला।
समझौता हो या न हो, हम जीत चुके हैं - ट्रंप
व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इस वार्ता को ज्यादा अहमियत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने बड़े ही बेबाक अंदाज में कहा, "देखते हैं क्या होता है, शायद समझौता हो जाए या शायद न हो। लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका के नजरिए से हम पहले ही जीत चुके हैं।" ट्रंप का यह बयान तब आया है जब उनके अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ मेज पर बैठे हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका अब इस स्थिति में है जहाँ उसे किसी समझौते की मजबूरी नहीं है।
बारूदी सुरंगों के बीच फंसा तेल का रास्ता
ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि भले ही बातचीत चल रही हो, लेकिन अमेरिकी सेना अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सक्रिय है। उन्होंने बताया कि सेना वहाँ बिछाई गई बारूदी सुरंगों की जांच कर रही है। यह समुद्री रास्ता फिलहाल लगभग बंद पड़ा है, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई करने वाले जहाजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान को सैन्य रूप से पछाड़ दिया है और अब वह इस समुद्री मार्ग को खाली कराने की प्रक्रिया में हैं।
चीन को खुली धमकी
इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने न सिर्फ ईरान, बल्कि चीन को भी आड़े हाथों लिया। जब उनसे पूछा गया कि चीन की ओर से ईरान को हथियार भेजे जाने की खबरें आ रही हैं, तो ट्रंप ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "अगर चीन ऐसा करने की जुर्रत करता है, तो उसे बहुत बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।" ट्रंप का यह रुख साफ करता है कि वह ईरान के बहाने चीन की घेराबंदी करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते, जिससे आने वाले समय में वाशिंगटन और बीजिंग के रिश्तों में और कड़वाहट आ सकती है।
नाटो ने नहीं दिया अमेरिका का साथ
अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों यानी नाटो (NATO) पर भी निशाना साधा। उन्होंने शिकायत भरे लहजे में कहा कि इस पूरे सैन्य अभियान के दौरान उन्हें नाटो से कोई खास मदद नहीं मिली। उन्होंने ईरान की वर्तमान स्थिति का मजाक उड़ाते हुए कहा कि अब उनके पास न कोई मजबूत नौसेना बची है और न ही रडार या वायु सेना। ट्रंप के अनुसार, ईरान के बड़े नेता जा चुके हैं और वह पूरी तरह कमजोर हो चुका है। अब देखना यह होगा कि ट्रंप के इन बयानों का इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता पर क्या असर पड़ता है।
Written by: Anushka Sagar






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