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Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जंग के बीच अमेरिका ने अपने ही विमान को बम से उड़ा दिया। जिसके बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका ने अपने ही विमान को क्यों उड़ाया। क्या वजह थी कि इतना बड़ा कदम लेना पड़ा। आइए जानते है इसके पीछे के कारण के बारें में।
तकनीकी खराबी के कारण बचाव अभियान हुआ फेल
एक रिपोर्टों के अनुसार, इस जोखिम भरे बचाव अभियान के दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान के रेगिस्तान में बने एक अस्थायी एयरफील्ड पर कई स्पेशल ऑपरेशंस ट्रांसपोर्ट विमान तैनात किए। जिसका मकसद दूसरे फंसे हुए अमेरिकी पायलट को वहां से निकालना था। लेकिन हालात इतनी खराब हो गई क्योंकि इनमें से कम से कम एक और शायद 2 विमान लैंडिंग के बाद बेकार हो गए। वहीं आशंका जताई जा रही कि कही किसी तकनीकी खराबी या फिर रेगिस्तान की नरम जमीन में फंस रहने के कारण हो सकता है।
अमेरिकी सेना ने विमानों को बम से उड़ा दिया
बचाव अभियान के दौरान ईरानी सेना करीब आ रही थी ऐसे में अमेरिकी सेना को टास्क पूरा करने के लिए और विमान बुलाने पड़े। खबरों के मुताबिक अमेरिकी सैनिकों ने उन 2 ट्रांसपोर्ट विमानों को बम से उड़ा दिया, जिन्हें वो इस दुर्घटना के कारण पीछे छोड़ने पर मजबूर हो गए थे।
अपने ही विमानों को अमेरिका ने क्यों किया नष्ट?
गौरतलब है कि अमेरिकी सेना ने इन विमानों को इसलिए नष्ट किया गया ताकि यह जोखिम ना रहे कि कोई संवेदनशील सामान ईरानी सेना के हाथ न लग जाए। और दुश्मन के इलाके में चलाए जाने वाले बेहद जोखिम भरे मिशनों के दौरान यह एक प्रोटोकॉल है। ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए एबटाबाद में चलाए गए मिशन के दौरान भी अमेरिकी सेना ने प्रोटोकॉल का पालन किया था।
रोटरक्राफ्ट के अवशेष देखे गए
वहीं विमान के मलबे में रोटरक्राफ्ट के अवशेष भी दिखाई दिए जो बोइंग MH-6 लिटिल बर्ड्स थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन छोटे हेलीकॉप्टरों को MC-130J विमान के अंदर से ही तैनात किया जा सकता है। ताकि स्पेशल ऑपरेशंस मिशनों में मदद की जा सके। दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अमेरिका ने अपने विमानों को बम से इसलिए उड़ाया ताकि राष्ट्रपति ट्रंप को शर्मिंदगी से बचाया जा सके।
Writen By: Geeta Sharma

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