-20°C की ठंड में मौत को मात, 5 घंटे बाद जिंदा निकला साइबेरिया का शख्स!

यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी प्रकृति और सही चिकित्सा पद्धति मिलकर असंभव को भी संभव बना देती हैं।

15 April 2026

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कहावत है जिसे ऊपर वाला बचाना चाहता है, उसे मौत भी छूकर निकल जाती है। रूस के बर्फीले क्षेत्र साइबेरिया से आई एक घटना ने इस बात को सच साबित कर दिया है। एक व्यक्ति, जो कई घंटों तक बिना सांस और बिना धड़कन के पड़ा रहा और जिसे डॉक्टरों ने मृत मान लिया था, वह न सिर्फ जीवित हुआ बल्कि कुछ ही दिनों में चलकर अस्पताल से बाहर भी निकल गया। यह घटना चिकित्सा विज्ञान के लिए भी किसी रहस्य से कम नहीं है।

बर्फ में दबा जीवन

साइबेरिया के मिरनी इलाके में यह अनोखा मामला सामने आया। एक व्यक्ति अत्यधिक शराब पीने के बाद ठंड में बेहोश होकर बाहर ही गिर पड़ा। उस समय तापमान करीब -20 डिग्री सेल्सियस था। वह लगभग 5 घंटे तक वहीं पड़ा रहा। जब लोगों ने उसे देखा, तो उसमें जीवन के कोई संकेत नहीं थे—न सांस, न नाड़ी, और न ही दिल की धड़कन। ECG मशीन पर भी कोई गतिविधि नहीं दिखी, जिससे उसे ‘क्लीनिकल डेड’ मान लिया गया।

डॉक्टरों ने नहीं मानी हार

अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टरों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। विशेषज्ञों की टीम ने बहुत सावधानी के साथ उसके शरीर को धीरे-धीरे गर्म करने की प्रक्रिया शुरू की। उनका लक्ष्य था कि शरीर का तापमान धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, ताकि कोई आंतरिक नुकसान न हो। करीब 4 घंटे की मेहनत से तापमान 25°C से 34°C तक पहुंचाया गया।

अपनाई गई‘ ग्रेजुअल रीवार्मिंग’ की प्रक्रिया

डॉक्टरों का मानना था कि यदि शरीर को तेजी से गर्म किया जाता, तो नसों को नुकसान पहुंच सकता था, जिससे हार्ट अटैक या ब्रेन हेमरेज का खतरा होता। इसलिए नियंत्रित तरीके से ‘ग्रेजुअल रीवार्मिंग’ की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद CPR और दवाओं की मदद से दिल को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की गई। करीब 25 मिनट बाद जीवन के संकेत दिखाई देने लगे।

ठंड ने बचाई जान

विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में अत्यधिक ठंड ही उस व्यक्ति के लिए सुरक्षा कवच बन गई। जब शरीर का तापमान बहुत कम हो जाता है, तो शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है और उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत भी कम पड़ती है। इससे मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंग सुरक्षित रह जाते हैं, जैसे वे किसी ‘संरक्षित अवस्था’ में चले गए हों।

चौंकाने वाली रिकवरी

सबसे हैरानी की बात यह रही कि करीब 24 घंटे बाद जब व्यक्ति होश में आया, तो उसके शरीर के सभी अंग सामान्य रूप से काम कर रहे थे। न तो उसे कोई गंभीर दिमागी नुकसान हुआ और न ही अन्य अंग प्रभावित हुए। केवल 5 दिनों के भीतर वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलकर अस्पताल से बाहर निकल गया।

Written By Toshi Shah 

 

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