महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा, शिवसेना यूबीटी में मची हलचल

बालासाहेब ठाकरे द्वारा बनाई गई शिवसेना टुकड़ों-टुकड़ों में बंटने की कगार पर हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हुई है।

12 घंटे पहले

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलावों की चर्चा तेज हो गई है। शिवसेना की स्थापना को 60 वर्ष पूरे होने वाले हैं, लेकिन इसी महत्वपूर्ण दौर में पार्टी के भीतर अस्थिरता की स्थिति दिखाई दे रही है। बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित संगठन पहले ही कई राजनीतिक झटके झेल चुका है और अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के सामने नई चुनौतियां खड़ी होती नजर आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजे जाने की भी चर्चा है। इसी बीच नई दिल्ली में बुलाई गई शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की बैठक में कथित तौर पर किसी भी संभावित बागी सांसद ने भाग नहीं लिया।

उद्धव ठाकरे ने दी प्रतिक्रिया

उद्धव ठाकरे ने इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसी भी परिस्थिति में चुनावी मुकाबले के लिए तैयार है, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो नेता संगठन छोड़ना चाहते हैं, वे अपनी राह चुन सकते हैं। इससे पहले वे सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी करने से बच रहे थे और आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे थे।

‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज

महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द खूब सुनाई दे रहा है। विपक्षी खेमे में यह माना जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को शिंदे गुट में शामिल कराने की कोशिशें इसी अभियान का हिस्सा हैं। इस संभावित संकट को टालने के लिए राज्यसभा सांसद संजय राउत सक्रिय बताए जा रहे हैं। वे दिल्ली में मौजूद हैं और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत तथा अनिल देसाई भी वहीं डेरा डाले हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व कानूनी और संसदीय विकल्पों पर विचार कर रहा है। संजय राउत और अनिल देसाई ने विशेषज्ञ वकीलों से सलाह-मशविरा किया है ताकि यदि सांसद दल बदलते हैं तो उपलब्ध कानूनी उपायों का आकलन किया जा सके। वहीं अनिल परब का कहना है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय में धनुष-बाण चुनाव चिह्न से जुड़े मामले की सुनवाई होती, तो उनकी स्थिति और मजबूत हो सकती थी।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति उद्धव ठाकरे के लिए आसान नहीं है। उनके अनुसार, देश की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच क्षेत्रीय दलों के सामने नई चुनौतियां उभर रही हैं।
लेखक और शिवसेना के इतिहास पर अध्ययन करने वाले प्रकाश अकोलकर का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में संसाधनों और प्रभाव की बड़ी भूमिका है। उनके अनुसार, बड़े राजनीतिक दलों की ताकत के सामने क्षेत्रीय संगठनों को संघर्ष करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पार्टी के कुछ समर्थकों का कहना है कि उद्धव ठाकरे को अपने राजनीतिक रुख पर मजबूती से कायम रहना चाहिए। उनका मानना है कि विपक्षी दलों को एकजुट होकर राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा।

शिवसेना के कई कार्यकर्ता दलबदल के विरोध में करेंगे आदोलन

इस बीच, शिवसेना के कई कार्यकर्ता संभावित दलबदल के विरोध में सार्वजनिक आंदोलन करने की तैयारी में भी बताए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जिन सांसदों के नाम इस पूरे घटनाक्रम में सामने आ रहे हैं, उनमें से कुछ पहले गठबंधन बदलने की खबरों से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

 

Written By Toshi Shah 

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